अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। प्रदेश सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रही हो लेकिन पांवटा में नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य राम भरोसे ही है। सिविल अस्पताल पांवटा में स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट स्थापित किया गया था लेकिन, पिछले एक माह से इस यूनिट की सेवाएं ठप हो गई हैं। विशेष रूप से प्रशिक्षित सात स्टाफ नर्स के पदों में से 4 नर्सों का स्थानांतरण हो चुका है। दो इन दिनों मेडिकल लीव पर चल रही हैं जिससे एक माह से यह यूनिट बंद है। हिमाचल प्रदेश में स्पेशल न्यू बॉर्न यूनिटों की स्थापना की गई थी। जिला सिरमौर के पांवटा अस्पताल में भी इस यूनिट के शुरू होने से लोगों को खास सुविधाएं मिलने लगी थीं। विशेषकर प्री मैच्योर बच्चों का वजन कम होने, एनीमिया, निमोनिया या पीलिया की शिकायत होने पर इन बच्चों का उपचार खास ढंग से इस यूनिट में होता था। इसके लिए योजना के माध्यम से विशेष प्रशिक्षित 7 स्टाफ नर्सों के पद भरे थे लेकिन एक माह से यह यूनिट बुरी तरह से प्रभावित होने पर बंद हो गया है। 7 में से 4 स्टॉफ नर्सों का सितंबर माह में स्थानांतरण हो गया। 2 नर्सें मेडिकल लीव पर हैं। शिलाई क्षेत्र निवासी राकेश कुमार, नाथू राम चौहान और प्रवेश शर्मा का कहना है कि पांवटा में इस यूनिट से बेहतर सुविधाएं मिल रही थीं। अब यूनिट बंद रहने से लोगों को काफी समस्या हो रही है। प्रदेश सरकार को गंभीरता से इस ओर ध्यान की जरूरत है। मजबूरन लोगों को उत्तराखंड, देहरादून, यमुनानगर या पीजीआई समेत और निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। नवजात के परिजनों को प्रतिदिन पांच से 10 हजार रुपये तक खर्च वहन करना पड़ रहा है। परिजनों को पांवटा में यूनिट होने के बावजूद काफी मानसिक और आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है।
सीएमओ सिरमौर डॉ. केके पराशर और पांवटा सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉ. संजीव सहगल ने कहा कि इसके बारे में प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। स्टाफ नर्सों की कमी के चलते दिक्कतें पेश आ रही हैं।