लौट आए पुराने दिन, पत्तों की पत्तल पर परोसी धाम
जनमंच कार्यक्रम में जिला प्रशासन ने की पहल
महिला मंडलों ने बनाए उत्पाद, प्रशासन करेगा मार्केटिंग
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। प्लास्टिक और थर्मोकोल से बनी वस्तुओं पर प्रतिबंध के बाद अब पुराने दिन लौट आए हैं। पत्तों से बनी पत्तलों का रिवाज शुरू हो गया है। रविवार को बेचड़ का बाग में हुए जनमंच कार्यक्रम में जिला प्रशासन ने खुद इसकी पहल की है। महिला मंडलों से जुड़ी महिलाओं ने पत्तलों और डोनों का कारोबार शुरू किया है। खास यह है कि जिला प्रशासन इसमें महिलाओं का अहम सहयोग कर रहा है।
जनमंच कार्यक्रम की अध्यक्षता करने पहुंचे कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने भी इस पहल की सराहना की। सिरमौर में मालझन, साल और सागवान के वन हैं। इन पेड़ों की पत्तियां डोने और पत्तलें बनाने में कारगर साबित हो रही हैं। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण की ओर से महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों को इस व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है। उपायुक्त सिरमौर ललित जैन ने बताया कि धारटीधार के दो महिला मंडलों थाना कसोगा और बिरला की महिलाओं को पत्तल और डोने बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इन महिला मंडलों ने मशीन के माध्यम से बेहतरीन पत्तलें और डोने बनाने भी शुरू कर दिए हैं।
डीसी ने कहा कि सिरमौर जिले के पच्छाद क्षेत्र और नाहन के धारटीधार क्षेत्र में मालझन, साल और सागवान के पेड़ काफी मात्रा में हैं। दशकों पहले भी इन्हीं पेड़ों के पत्तों से पत्तलें तैयार की जाती थीं। इन्हें विवाह एवं अन्य समारोह में प्रयोग किया जाता था। अब फिर इन्हें बेहतरीन तरीके से तैयार करवाया जा रहा है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। स्वयं सहायता समूहों को बैंकों के साथ जोड़कर उन्हें डोने-पत्तल बनाने की मशीनें भी प्रदान की जा रही हैं। इससे अतिरिक्त जिले के सभी विकास खंडों पर महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों को पत्तलों एवं डोने बनाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन इसकी मार्किट का भी उचित प्रबंध करेगा। जैम पोर्टल के माध्यम से इसकी मार्केटिंग की जाएगी।