नाहन (सिरमौर)।
शिमला में हुए डबल मर्डर ने सिरमौर के दो परिवारों को कभी न भूलाने देने वाले गहरे जख्म दे दिए हैं। ऐसे जख्म जो ताउम्र दो घरों को खून के आंसू रुलाएंगे। मर्डर की वारदात ने मांग का सिंदूर तो उजाड़ा ही, भाई की भी कलाई हमेशा के लिए छिन गई है। इन गरीब परिवारों में न पत्नी को अब पति का सहारा मिलेगा और न ही गरीब बाप को बेटे का।
शिमला में हुए डबल मर्डर ने दो परिवारों की खुशियों पर ग्रहण सा लगा दिया है। शिमला में हुए मर्डर मामले में लुटेरों ने सगे जीजा व साले को मौत के घाट उतार दिया। इस वारदात में मारे गए 32 वर्षीय नवीन कुमार और 19 वर्षीय चंद्र प्रकाश का संबंध जीजा व साले का था।
नाहन के सतीवाला गांव का रहने वाला जीजा नवीन कुमार पिछले लंबे समय से आटा मिल की एक गाड़ी से अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। वहीं, साले चंद्र प्रकाश निवासी चूड़ कल्यारी (तिरमली, ददाहू) भी अपने जीजा के साथ पिछले लंबे समय से रह रहा था। एक साथ गाड़ी में जाना और सामान लेकर वापस लौटने का सिलसिला काफी समय से चल रहा था। क्या पता था कि एक दिन दोनों को अपने परिवारों को गहरे जख्म देकर बुरी तरह से मौत का सामना करना होगा।
नवीन व चंद्र प्रकाश की बहन निर्मला की शादी पांच साल पहले हुई थी। गरीबी थी, लेकिन दोनों ही परिवार काफी खुश थे। चंद्र प्रकाश के पिता रमेशचंद मिस्री का काम करते हैं जो दिहाड़ी आदि लगाकर अपना परिवार पाल रहे थे। अब न तो घर का बड़ा बेटा चंद्रपाल कभी मां-बाप के लिए बुढ़ापे का सहारा बनेगा और न ही निर्मला को अपने पति नवीन कभी वापस मिल पाएगा। नवीन अपने पीछे पत्नी के साथ-साथ दो छोटे बच्चे छोड़ गया है। बताया जा रहा है कि नवीन व चंद्र प्रकाश वीरवार सुबह करसोग के लिए निकले थे लेकिन वापस आते वक्त दोनों का शोघी के समीप बेरहमी से मर्डर कर दिया गया।
पता चला है कि चंद्र प्रकाश को गाड़ी चलाने का शौक था। इसी वजह से वह अपने जीजा नवीन कुमार के साथ परिचालक के रूप में काम करता था। नवीन भी मिल में बतौर चालक काम कर अपने परिवार की गुजर बसर कर रहा था लेकिन अब दोनों परिवारों के पास न तो कोई कमाने वाला बचा है और न ही कोई उम्मीद की किरण।
बहरहाल, इस वारदात के बाद जिला सिरमौर में शोक की लहर दौड़ गई है। इस वारदात ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।