पांवटा साहिब/ राजगढ़/ ददाहू/ संगड़ाह/ शिलाई (सिरमौर)।
हिमाचल प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे जमीन स्तर पर धराशाही हो रहे हैं। चिकित्सकों की कमी और टेस्ट सुविधाओं का अभाव में अस्पतालों पहुंचे मरीजों का मर्ज घटने की बजाय बढ़ रहा है। सिरमौर के सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कई टेस्टों तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कहीं टेस्ट नहीं हो रहे हैं तो कहीं एक्सरे तक की सुविधा नहीं। पांवटा, राजगढ़, शिलाई, ददाहू, संगड़ाह और नौहराधार के अस्पतालों में सरकार माकूल सुविधाएं नहीं जुटा पाई है।
पांवटा सिविल अस्पताल तीन विस क्षेत्र को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यहां 500 से 700 की ओपीडी रहती है। डॉक्टर के कैबिन से बरामदे तक भीड़ रहती है। अस्पताल में दो साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है जिससे यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे। गर्भवती महिलाओं को भी निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है। महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं मिल रही। गायनी व अन्य डॉक्टरों के पास अल्ट्रा साउंड के प्रतिदिन 50 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में सर्जन व एनेस्थीसिया के पद रिक्त हैं।
पांवटा पहुंचे तीमारदार अशरफ, आशा शर्मा, जीवन सिंह, मरीज कपिल शर्मा, सुरेंद्र शर्मा व अखिल ने बताया कि बेहतरीन अस्पताल भवन तो बन गया है। अब सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट व एनेस्थीसिया विशेषज्ञ समेत रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए।
उधर, यही हाल राजगढ़ का भी है। यहां डॉक्टरों के आठ पद स्वीकृत हैं जिसमें से छह खाली पड़े हैं। फार्मासिस्टों के तीन पद स्वीकृत हैं जो तीनों खाली पड़े हैं। वरिष्ठ रेडियोग्राफर व रेडियोग्राफर के पद भी रिक्त हैं। लैब तकनीशियन का एक पद भी खाली है।
ददाहू में भी स्वास्थ्य सुविधा बदहाल है। लंबे अरसे से एक्सरे की पेमेंट नहीं हो पाई है जिस वजह से एक्सरे नहीं हो रहे। इसी वजह से एंबुलेंस भी बंद पड़ी है। 50 बिस्तरों वाले चिकित्सकों के कुल आठ में से छह पद खाली हैं। इस अस्पताल में स्टाफ नर्स सहित कुल 4 नर्सें अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां स्टाफ नर्स का एक व वार्ड सिस्टर के 4 पद खाली पड़े हुए हैं।
इसी प्रकार शिलाई में चार में से एक पद खाली हैं। यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही। संगड़ाह भी चार में से दो पद खाली चल रहे हैं। नौहराधार में भी चिकित्सक का एक पद खाली है।
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पांवटा में ट्रामा सेंटर की जरूरत
जिला सिरमौर में सड़क हादसों में से 50 फीसदी़ मामले केवल पांवटा उप मंडल क्षेत्र में होते हैं। लंबे समय से स्थानीय अस्पताल में ट्रामा सेंटर खोलने की मांग रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विगत वर्ष एक कार्यक्रम में ट्रामा सेंटर को पांवटा में खोलने की बात भी कही थी लेकिन अभी तक इसकी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। आईसीयू, डायलेसिस, ब्लड बैंक सुविधा भी यहां नहीं है।
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अस्पताल में 4 डॉक्टरों समेत 18 पद हैं रिक्त
सिविल अस्पताल पांवटा में कुल 86 स्वीकृत पद है जिसमें 4 विशेषज्ञ डॉक्टरों समेत कुल 18 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों से चिकित्सकों पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है। अस्पताल में रिक्त पदों में सर्जन, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजिस्ट सहित चिकित्सकों के 4 पद, चीफ फार्मासिस्ट का 1, स्टाफ नर्स के 3, सीनियर लैब तकनीशियन, लैब अटेंडेंट, डेंटल हाईजेनिस्ट, डेंटल मैकेनिक व न्यूटरेशनल काउंसलर का 1-1 पद भी खाली चल रहा है।