अमर उजाला ब्यूरो
सतौन (सिरमौर)।
खान सुरक्षा सप्ताह पर आयोजित उत्तरी भारत के पांच राज्यों में जिला सिरमौर की जय सिंह ठाकुर एंड सन्स की बल्दवा लाइम स्टोन को अर्ध मशीनीकृत खान में सर्वश्रेष्ठ खान का खिताब मिला है। इस श्रेणी में पांच राज्यों की 23 खानें शामिल थीं। दो दिसंबर को चंडीगढ़ में आयोजित 27 वें खान सुरक्षा सप्ताह के समापन समारोह में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
समारोह में उप महानिदेशक खान सुरक्षा महानिदेशालय एम सत्यामूर्ति बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट के प्लांट हैड जोगिंद्र ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की।
गौरतलब है कि खान सुरक्षा सप्ताह के दौरान एक टीम खान का पूरा निरीक्षण करती है और खान के सुरक्षा के उपकरण और दस्तावेजों का निरीक्षण करती है। खान प्रबंधकों द्वारा खनन मजदूरों को सुरक्षा की दृष्टि से क्या उपाय किए गए हैं? इसकी बाकायदा पूरी जांच की जाती है। जय सिंह ठाकुर की बल्दवा लाइम स्टोन खान को खनन कार्य, खनन सड़क, खनन में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रण रखना, वायु प्रदूषण को नियंत्रण रखना, खनन में लाइट की सही व्यवस्था, खनन क्षेत्र के स्वच्छता और कार्यशाला की स्वच्छता में बेहतरीन उपायों के दृष्टि से प्रथम पुरस्कार मिला। इसी खान को सर्वश्रेष्ठ खान का भी पुरस्कार मिला।
इन खानों को भी किया गया पुरस्कृत।
27वें खान सुरक्षा सप्ताह में 5 अन्य श्रेणी की खानों को भी पुरस्कृत किया गया। श्रमिक खान में संगड़ाह लाइम स्टोन माइन को प्रथम, दीपक चावल की बनोर लाइम स्टोन माइन को द्वितीय, राजेंद्र सिंह की बरवाना माइन को तृतीय स्थान मिला। मार्बल और रेत की अर्ध मशीनीकृत खान में अग्रवाल सिलिका और शिवालिक सिलिका को प्रथम, प्रमोद मार्बल की खो मार्बल को द्वितीय और मलाणा की बीएलएस को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। मशीनीकृत स्टोन माइन श्रेणी में बख्रिजा प्लांट नंबर 2 को प्रथम, माला कुमार की अटेला स्टोन माइन को द्वितीय और एएसडीआर केएसजेवी की खेरीबत्तर 2 स्टोन माइन को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
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बल्दवा खान को 15वीं बार मिला पुरस्कार
खान सुरक्षा की दृष्टि से 1991 से 2017 तक जय सिंह ठाकुर एंड सन्स की बल्दवा लाइम स्टोन खान को 15 वीं बार सर्वश्रेष्ठ खान का पुरस्कार मिल चुका है। 1991, 1995, 1996,1998,2002 और 2013 में इस खान को सर्वश्रेष्ठ खान का पुरस्कार मिला है। इसके अलावा खनन सुरक्षा महानिदेशालय इस खान को बेहतरीन ढंग से खनन कार्य करने के लिए सन 2003 में द्रोणा ट्रॉफी, 2004, 2005, 2006, 2007, 2008, 2009 और 2010 में विश्वकर्मा अवार्ड से सम्मानित कर चुकी है।