लोगों की मर्जी पर लगेगा व्हाइट सीमेंट प्लांट
108 हेक्टेयर भूमि में होगा स्थापित
कई संगठन प्लांट का कर रहे विरोध
कपिल ठाकुर
नौहराधार (सिरमौर)। उपमंडल संगड़ाह के नौहराधार में प्रस्तावित व्हाइट सीमेंट प्लांट का बनना या न बनना लोगों की इच्छा पर निर्भर करेगा। यदि स्थानीय लोग प्लांट के लिए 108 हेक्टेयर भूमि देने के लिए तैयार हो जाते हैं तो पांच साल के भीतर यह प्लांट लग जाएगा।
मंत्रिमंडल की बैठक में आठ मई को मंजूरी मिलने के बाद 27 जून को सरकार ने यहां खनन कार्य के लिए अरावली जिप्सम को लेटर ऑफ इंटरेस्ट (मंशा पत्र) भी जारी कर दिया है। ऐसे में सरकार और एफसीसीआई अरावली के बीच होने वाले समझौते के बाद प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। सीमेंट प्लांट और खदान के लिए अधिग्रहण किए जाने वाली भूमि का एसडीएम संगड़ाह की अध्यक्षता वाली कमेटी पहले ही निरीक्षण कर चुकी है। उसके बाद उपायुक्त सिरमौर ने भी भूमि को देखा और लोगों की राय जानी। उचित मुआवजा मिलने की स्थिति में कई भू-स्वामी अपनी जमीन देने को तैयार हैं। जबकि, कुछ पर्यावरण बिगड़ने का हवाला देते हुए इसका विरोध भी कर रहे हैं। सीटू, पर्यावरण बचाओ समिति, किसान सभा आदि संगठन इस प्लांट पर पहले ही विरोध जता चुके हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण ही नहीं बल्कि किसानों की खेती भी नष्ट हो जाएगी। सफेद सीमेंट प्लांट से जहां दो सौ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा वहीं तीन हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा।
उपक्रम अरावली को मिला पत्र
भारत सरकार के उपक्रम अरावली जिप्सम एंड मिनरल के महाप्रबंधक सुरेंद्र सिंह शेखावत तथा प्रबंध निदेशक एवं संयुक्त सचिव उर्वरक विभाग भारत सरकार अलका तिवारी आईएएस ने कहा कि सरकार ने प्लांट के खनन पट्टे के लिए मंशा पत्र जारी कर दिया है। इस प्लांट को इस ढंग से स्थापित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों को अन्य उद्योगों की तरह नुकसान न पहुंचे।