अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)
सरकारी स्कूलों के लिए फर्नीचर, अलमारी और अन्य सामान की खरीद-फरोख्त में कथित गड़बड़झाला के आरोप लगाए गए हैं। स्कूलों में रेट कांट्रेक्ट से अधिक दामों पर फर्नीचर की खरीदारी की जा रही है। रेट कांट्रेक्टर निशिकांत और प्रवीण अग्रवाल ने बाकायदा पत्रकार वार्ता बुलाकर स्टील फर्नीचर में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव, निदेशक और उद्योग विभाग के स्टोर कंट्रोलर को शिकायत भेजकर मामले की उचित जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि फर्नीचर खरीद में न तो गुणवत्ता का ख्याल रखा जा रहा है और न ही मूल्य में रियायत दी जा रही है। हाल ही में आदर्श स्कूलों के लिए हुई खरीद में गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं। निशिकांत और प्रवीण ने बताया कि शिक्षा विभाग और कुछ अन्य विभागों में स्टील फर्नीचर की खरीद सरकारी एजेंसी से की जा रही है। राज्य हस्तशिल्प और हथकरघा निगम को करोड़ों रुपये के फर्नीचर के ऑर्डर दिए गए हैं जो नियमों के विपरीत है। उनका कहना है कि चार फर्मा के रेट कांट्रेक्ट के बावजूद सरकारी एजेंसी को सप्लाई दी जा रही है। रेट कांट्रेक्टरों के मूल्य से अधिक कीमत पर सामान खरीदा जा रहा है। उन्होंने फर्नीचर खरीद में कमीशन का खेल चलने के भी आरोप लगाए हैं। सीएम को लिखे पत्र में निशिकांत ने कहा है कि सरकारी विभागों को स्टील अलमारी की सप्लाई 5100 रुपये में होनी चाहिए, लेकिन निगम यह सप्लाई 9 हजार रुपये में कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर क्यों सरकारी एजेंसी को ही कार्य दिया जा रहा है? जब सस्ते दामों पर फर्नीचर मुहैया हो सकता है तो महंगे दामों पर क्यों खरीदा जा रहा है?
उद्योग विभाग के कंट्रोलर ऑफ स्टोर की ओर से सरकारी विभागों में सामान की आपूर्ति के लिए मूल्य अनुबंध किया जाता है। इसके लिए बाकायदा नमूनों का भी निरीक्षण किया जाता है। रेट अनुबंध के मुताबिक सरकारी विभाग फर्मों से सामान खरीद सकते हैं। आरोप है कि हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम का न तो रेट अनुबंध है और न ही सप्लाई से पहले नमूनों की पड़ताल की जा रही है। कारोबारी निशीकांत और प्रवीण अग्रवाल का कहना है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
उच्च स्तर पर तय होता है फैसला
शिक्षा विभाग के उप निदेशक सुधाकर शर्मा ने बताया कि कहां से समाना खरीदना है, यह उच्च स्तर पर ही तय होता है। ऊपर से ही रेट फाइनल होते हैं। हस्तशिल्प और हथकरघा को बढ़ावा देने के मकसद से कार्य निगम को ही दिए जाते हैं। गुणवत्ता चेक करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को दी गई है। हाल ही में आदर्श स्कूलों के लिए हुई खरीदारी में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं, जिसकी जांच की जा रही है।