अमर उजाला ब्यूरो
सतौन/ पांवटा साहिब (सिरमौर)। गिरिपार की ग्राम पंचायत भजोन के दूरदराज बाग आबड़ा गांव तक सड़क पहुंचाने का मामला पांच साल में एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया। तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश एवं घोषणा के बावजूद सड़क निर्माण शुरू होना तो दूर वन विभाग की मंजूरी भी नहीं मिल पाई। वन विभाग से सड़क निर्माण की अनुमति लेने की औपचारिकताएं पूरी करने में ही विभाग को पांच साल का समय लग गया। हाल ही में एफआरए ने केस साइट पर अपलोड किया है। सड़क निर्माण के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार 50 लाख रुपये का बजट भी लोनिवि के पास उपलब्ध है।
गौरतलब है कि बाग आबड़ा गांव तक अभी भी सड़क नहीं पहुंची है। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। शनिवार को भी 60 साल की बुजुर्ग जेनो देवी को बांस के डंडे में कपड़ों के सहारे बांद कर मुख्य सड़क तक लाकर अस्पताल पहुंचाया गया था। जेनों देवी के स्वस्थ में सुधार हुआ है।
तबीयत में सुधार के बाद महिला को पांवटा अस्पताल से घर भेज दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं है। जरा भी स्वास्थ्य बिगड़ा तो सेहत राम भरोसे ही है। बांस के डंडों के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कई बार मुख्य मार्ग पर पहुंचने से पहले बीमार या घायल की जान तक खतरे में पड़ जाती है। ऐसे में इस गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाना जरूरी है। ग्राम पंचायत भजोन के उप प्रधान तुला राम शर्मा, गंगा राम, दीप राम शर्मा, तोता राम, लायक राम, जगत सिंह व सूरत सिंह का कहना है कि बीमार महिला जेनो देवी की तबीयत में काफी सुधार है। तीन दिनों तक पांवटा अस्पताल में भर्ती रही। अब हालत में सुधार पर घर वापस भेज दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा विकास के लिए सबसे पहले होना जरूरी है लेकिन सात दशकों के बाद भी बागआबड़ा तक मात्र 6 किमी सड़क नहीं बन सकी है। हैरानी इस बात की है पूर्व सरकार में खुद सीएम की घोषणा के बावजूद विभाग इस संपर्क मार्ग योजना को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीके उप्रेती ने बताया कि सड़क निर्माण में वन विभाग की जमीन आड़े आ गई है। फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए सीएम की घोषणा के तुरंत बाद आवेदन किया गया था। अब कुछ महीने पहले एफआरए आई है। इसके बाद इससे जुड़े तमाम दस्तावेज साइट पर डाले जाएंगे।