अमर उजाला ब्यूरो
शिलाई/ राजपुर (सिरमौर)। गिरिपार क्षेत्र के विभिन्न गांवों में शुक्रवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। गणेश चतुर्थी के अवसर पर विभिन्न मंदिरों में पांजवी पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महासू देवता का पवित्र स्नान हुआ। मंदिरों में भव्य शोभा यात्राएं निकाली गईं जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर कई स्थानों पर भंडारे का भी आयोजन किया गया।
शिलाई इलाके के गांवों में महासू देवता की पालकियों, छड़ियों व प्रतिमाओं का स्नान करवाया गया। कार्तिक स्वामी के अवतार माने जाने वाले महासू देवता का स्नान गणेष चतुर्थी के दिन किया जाता है। करीब दो दर्जन से ज्यादा गांवों में महासू देवता के पांजवी पर्व पर स्नान का आयोजन हुआ। हनोल के बाद स्थापित पहला महासू देवता का मंदिर कोटी में है। यहां पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। पांजवी पर्व के उपलक्ष्य पर कोटी मंदिर में सभी करिंदों ने देव स्नान की परंपरा का निर्वहन किया। देवता के पुजारी, ठाणी, भंडारी, ढडवारी, ढाकी, देयाल, बड़ेथानी सभी मंदिर में एकत्रित हुए जहां पहले बोठा देवता का स्नान हुआ। उसके बाद देवता की पालकी, छड़ी को गांव से कुछ दूरी पर देव पानी की देव जलधार में स्नान करवाया गया।
देवता के पुजारी मुुंशीराम खदराई, भंडारी डॉ. हीरा सिंह नेगी, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कंवर सिंह राणा का कहना है कि वह शान के साथ अपनी आस्था से यह देव कार्य निभाते हैं। इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया गया। वीरवार को यहां जागरण का भी आयोजन हुआ।
उधर, जिले के शमाह, नघेता, टीटीयाणा, शिल्ला, डाबरा सहित कई गांवों में पांजवी पर्व की धूम रही। अपने कुल देवता महासू देव से परिवार, गांव व इलाके की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना के लिए दो से तीन दिन तक इस पर्व को आयोजन होगा। शमाह के बुजुर्ग पंडित जोगीराम, जातिराम शर्मा, पंडित सिंघराम, सुमेर चंद नंबर दार, पंडिर रमेश चंद, दीपा राम पुरोहित, गीताराम, धर्मसिंह, चुहीराम, रतिराम, शोभाराम, मायाराम, ब्रह्मानंद, विक्की आदि ने बताया कि विधि विधान के साथ महासू देवता का पवित्र स्नान कराया गया।
----महासू देवता के मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
पांजवी पर्व पर हुआ महासू देवता का पवित्र स्नान
गिरिपार के विभिन्न मंदिरों में निकली शोभा यात्राएं