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बेमौसमी बारिश ने तबाह कर दिया लहसुन

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अमर उजाला ब्यूरो
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नौहराधार (सिरमौर)।
भारी अंधड़, बेमौसमी बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पिछले कुछ दिनों से जारी मौसम के कहर ने फसलें तबाह कर दी हैं। लहसुन की खेती के लिए मशहूर गिरिपार क्षेत्र के किसानों के हाथों इस बार भारी निराशा हाथ लगी है। बेमौसमी बारिश के चलते तबाह हुई लहसुन की फसल की खुदाई का कार्य चल रहा है। मौसम के कहर के चलते लहसुन खेतों में ही सड़ने लगा है। इस समय लहसुन के दामों में भी भारी गिरावट चल रही है।
सिरमौर जिला के उपरले क्षेत्र में लहसुन की खुदाई शुरू हो गई है लेकिन खेतों से खोदी जा रही लहसुन को किसान सुखा भी नहीं पा रहे हैं। किसानों ने आधे से ज्यादा लहसुन की खुदाई कर दी है। कई किसान खेतों में तंबू लगाकर लहसुन की कटाई करने में लगे हैं।
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इस वर्ष पहले ही लहसुन के भाव बहुत कम है। लहसुन 30-35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिल रहा है। जबकि, किसानों ने इसका बीज 80 और 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदकर खेतों में बीजा था। बाजार में चल रहे इस भाव से किसानों की मेहनत, बीज, खाद व गोबर की कीमत भी पूरी नहीं हो सकती। चार दिन से अंधड़, बारिश व ओलावृष्टि से खेतों में टमाटर, मटर, मिर्च भी तबाह हो गई है। यही नहीं ओलावृष्टि व तूफान से सेब को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस समय में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब व आडू के पौधों में फ्लावरिंग की प्रक्रिया चल रही है।
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नौहराधार क्षेत्र के प्रगतिशील किसान संजय कुमार, वीर सिंह, रमेश चौहान, जगमोहन, पदम सिंह, मोहन लाल, उजागर सिंह, मनोज, राजेश आदि ने बताया कि इस वर्ष पहले ही लहसुन के दाम काफी कम मिल रहे हैं। ऊपर से मौसम की मार ने बाकी की कसर पूरी कर दी है। अन्य नकदी फसलें भी तूफान से खत्म हो गई हैं। किसानों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि क्षेत्र का दौरा कर बर्बाद फसलों का जायजा लिया जाए। साथ ही सरकार मौसम के कारण खराब हुई फसलों का उचित मुआवजा प्रदान करे।
 
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