नाहन (सिरमौर)। कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सिरमौर को कॉलेज तो दे दिए, लेकिन अब सरकार यहां स्टाफ देने को तैयार नहीं है। हैरानी की बात है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है। आज दिन तक सरकार ने ऐसे कॉलेजों को स्टाफ नहीं दिया। स्टाफ की तैनाती को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधि धरने प्रदर्शन कर चुके हैं। हालत फिर भी जस की तस है। जनपद सिरमौर के तीन कॉलेज नारग, ददाहू व रोहनाट की हालत किसी से छिपी नहीं है। कहीं प्रिंसिपल और क्लर्क तो तैनात कर दिए हैं, स्टाफ नहीं दिया। यहां तक कि इन कालेजों में सैकड़ों छात्र दाखिला ले चुके हैं। बच्चों के समक्ष यह चिंता है कि अब वे इन कॉलेजों को छोड़कर जाएं तो जाएं कहां। अगले माह ही कॉलेजों में परीक्षाएं हैं। इंटर असेसमेंट कौन देगा। भले ही छात्र जैसे तैसे परीक्षा भी पास कर लेंगे, लेकिन जब तक इंटरनल असेसमेंट नहीं होगी तो पास छात्र भी फेल ही माना जाएगा। मौजूदा समय में ददाहू कॉलेज में सबसे ज्यादा 144 बच्चे अध्ययनरत हैं। जहां बिना प्राध्यापक के बच्चों को छुट्टी दे दी गई है। इससे पहले संगड़ाह कॉलेज के दो प्राध्यापक ददाहू में तैनात किए गए थे। इन्हें भी वापस बुला लिया गया और बच्चों को तब तक छुट्टी दे दी गई जब तक कोई प्राध्यापक नहीं आ जाता। यही हाल नारग कॉलेज का है। यहां 35 के करीब छात्र हैं। बीते दिनों पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर के नेतृत्व में भूख हड़ताल शुरू की गई। कई लोगों ने एक सप्ताह कर क्रमिक अनशन किया। फिर भी सरकार ने स्टाफ नहीं दिया। वहीं रोहनाट कॉलेज में 51 बच्चे अध्ययनरत हैं। यहां पर 24 जुलाई को सरकार ने प्रो. हेमंत को बतौर प्रिंसिपल तैनात किया है। यहां पर एक क्लर्क के अलावा तीन चौकीदार भी हैं। जहां तक बच्चों की पढ़ाई की बात है तो एक भी कक्षा आज दिन तक नहीं लगी। कॉलेज पंचायत के तीन कमरों में चल रहा है। टूटे फूटे व सीलन वाले एक कमरे में कक्षा लग रही है तो दूसरे में प्रिंसिपल और तीसरे में क्लर्क को बिठाया गया है।
पूर्व की कांग्रेस सरकार ने रेवड़ियों की तरह सिरमौर को कॉलेज बांट दिए। न बजट का प्रावधान किया और न ही अन्य सुविधाएं दीं। यह सिर्फ पॉलीटिकल स्टंट था। जयराम सरकार इन कॉलेजों में स्टाफ व मूलभूत ढांचा तैयार करने के लिए संजीदगी से काम कर रही है।
- विनय गुप्ता, जिला भाजपा अध्यक्ष
कॉलेज में पढ़ रहे बच्चों के साथ सरकार भेदभाव की राजनीति कर रही है। जहां पर डेपुटेशन पर प्राध्यापकों को तैनात किया गया था, वहां से भी टीचर वापस बुला लिए गए। कांग्रेस सरकार ने बच्चों की सुविधा के अनुसार घरद्वार पर ही कॉलेज दिए, लेकिन भाजपा सरकार नहीं चाहती कि इन कॉलेजों में स्टाफ तैनात करे।
- अजय सोलंकी, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष