अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। चोट के कारण नौकरी गंवा चुके बीपीएल परिवार से संबंधित जोगीराम ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से खुद के लिए नौकरी की गुहार लगाई है। पांवटा के बाइला गांव का 52 वर्षीय जोगी राम खोई हुई नौकरी को पाने के लिए पिछले 10 सालों से लोक निर्माण व जिला प्रशासन के धक्के खा रहा है लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
‘अमर उजाला’ कार्यालय पहुंचे जोगीराम ने बताया कि वह वर्ष 1986-87 में शिलाई लोक निर्माण विभाग में बेलदार लगा था। इस दौरान वह पूरी मेहनत के साथ अपनी नौकरी करता रहा। वर्ष 2004 में उसे चोट लग गई। काम के दौरान उसकी आंख में पत्थर चले गए थे तथा पैर चोटिल हो गया था। इस कारण उसका आईजीएमसी शिमला तथा पीजीआई चंडीगढ़ में 15 दिन तक इलाज चला।
इलाज करवा कर जब वह नौकरी पर वापिस आया तो ठोंठा जाखल के करीब टटियाना रोड पर फिर से काम पर लग गया। तीन महीने काम करने के बाद उसे विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वह थोड़ा आराम कर ले। जब ठीक हो जाए तो नौकरी पर आ जाना। जोगीराम ने बताया कि दो चार दिन आराम करने के बाद जब वह नौकरी पर आया तो देखा कि उसकी जगह वहां कोई दूसरा काम कर रहा है। वह तबसे लेकर आज तक विभागीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के समक्ष धक्के खा रहा है लेकिन उसे नौकरी नहीं दी जा रही है।
जोगीराम ने कहा कि उसने 18 साल बेलदार के रूप में कार्य किया है। उसे उम्मीद थी कि वह एक दिन पक्का हो जाएगा तथा उसका बुढ़ापा आराम से कट जाएगा लेकिन चोट लगने के बाद विभागीय अधिकारियों ने उसे ठग दिया। इस कारण उसकी नौकरी चली गई। जबकि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी। जोगी राम ने कहा कि या तो उसे नौकरी दी जाए या फिर उसकी जगह उसके बेटे को नौकरी पर रखा जाए। अन्यथा उसे मुआवजा प्रदान किया जाए।
--खोई नौकरी पाने को दर-दर भटक रहा जोगीराम
चोट के कारण 18 साल की मेहनत पर फिरा पानी