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घर में चूना पत्थर के भंडार, उद्योग कर रहे विदेशों से आयात

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पर्यावरण मंजूरी के फेर में फंसीं 35 चूना पत्थर खानें
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घर में चूना पत्थर के भंडार, उद्योग कर रहे विदेशों से आयात
सिरमौर में सिर्फ चौदह खानों में ही हो पा रहा है खनन
राजपाल शर्मा
सतौन (सिरमौर)। जनपद सिरमौर में चूना पत्थर के भंडार पड़े हैं लेकिन हर वर्ष चूना पत्थर के कारोबार में कमी दर्ज की जा रही है। इसका मुख्य कारण यहां की चूना पत्थर खानों का बंद होना है। पर्यावरणीय मंजूरी के फेर में फंसीं करीब 35 खानें बंद पड़ी हुई हैं। वर्तमान में सिर्फ 14 खानों में ही खनन हो पा रहा है। हालात यह है कि अपने घर में चूना पत्थर का भंडार होने के कारण जिले के उद्योगों में विदेशी चूना पत्थर का प्रयोग किया जा रहा है।
जिले में चूना पत्थर की खाने बंद होने के कारण पोल्ट्री ग्रिट के उद्योग भी बंद होने के कगार पर हैं। सतौन और पुरुवाला में कई उद्योग बंद हो चुके हैं। बाहरी राज्यों में स्थापित पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों का दाना राजस्थान से मंगाया जा रहा है। जबकि कालाअंब, पांवटा साहिब के अलावा हरियाणा आदि के उद्योगों में चूना पत्थर मलेशिया, पाकिस्तान आदि देशों का इस्तेमाल हो रहा है। इसे बाहरी राज्यों से मंगवाया जा रहा है। जिले में कमरऊ, बनोर, रेणुकाजी में 49 चूना पत्थर की खाने हैं। इनमें से 14 खानें चल रही हैं, जबकि 35 खाने बंद हैं। सिरमौर माइंस ओनर एसोसिएशन के अध्यक्ष मीत सिंह ठाकुर का कहना है कि प्रदेश सरकार को सरल खनन नीति बनाकर खनिज के दोहन की ओर कदम बढ़ाने चाहिए। इससे जिले में रोजगार के द्वार खुलने के साथ ही सरकारी राजस्व में भी इजाफा होगा। जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने बताया कि पर्यावरणीय मंजूरी के पेच में फंसीं कुछ खानें बंद पड़ी हैं। इसकी प्रक्रिया एनजीटी में विचाराधीन है। वर्तमान में सिर्फ चौदह खानें कार्य कर रही हैं।
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सरकारी खजाने को भी लगी चपत
सरकार के राजस्व को देखें तो इस वजह से सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2016-17 में रॉयल्टी के तौर पर सरकार को 19.69 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। जबकि 2017-18 में पांच-छह करोड़ से ज्यादा की कम रॉयल्टी सरकार को मिली है। बीते वर्ष 14.28 करोड़ का राजस्व मिला है। 2018-19 में तीन महीने में 1.92 करोड़ का राजस्व ही सरकारी खजाने में जमा हो चुका है, जो बहुत ही कम है।
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