नौहराधार (सिरमौर)। चूड़धार की यात्रा पर निकले युवक और युवती ने तीन दिन और दो रातें भूखे पेट गुजारीं। दोनों अपने साथ खाने के लिए कुरकुरे और चिप्स लेकर गए थे। रविवार और सोमवार की रात तथा रविवार, सोमवार और मंगलवार का पूरा दिन उन्हें खाना भी नसीब नहीं हुआ। बर्फ के बीच कड़ाके की ठंड में दोनों कैसे रहे होंगे? दोनों नौहराधार तक एक बाइक पर आए थे। उनका बाइक अभी भी नौहराधार में ही खड़ा है।
प्रतिबंध के बावजूद युवक और युवती चूड़धार की ट्रैकिंग पर निकले थे और वापसी में रास्ता भटक गए थे। दोनों गुफा में रुके। जबकि बर्फ के बीच चट्टानों पर सोकर रात गुजारी।
बताया जा रहा है कि रास्ता भटक कर दोनों सतांह नामक जंगल की ओर निकले। मोबाइल के माध्यम से उन्होंने सर्वप्रथम होटल संचालकों को रास्ता भटकने की बात कही। इसके बाद नौहराधार प्रशासन ने एक रेस्क्यू टीम उनकी तलाश में भेजी। इसमें तीन पुलिस के जवान, दो वन कर्मचारी, चार राजस्व विभाग के कर्मचारी और एक स्थानीय ग्रामीण शामिल था। सिरमौर पुलिस ने शिमला पुलिस से संपर्क किया तो वहां से भी एक रेस्क्यू टीम चोटी की ओर निकली। लेकिन, दुर्गम पहाड़ी पर फंसे होने के कारण टीम उस तक नहीं पहुंची। रितेश के भाई देवेंद्र सिंह ने दिल्ली की एक कंपनी का निजी चौपर हायर किया और देहरादून से चूड़धार के लिए उड़ान भरी। दोपहर बाद युवक और युवती दोनों को ट्रेस किया गया। लेकिन, उन्हें रेस्क्यू नहीं किया जा सका। करीब आधा घंटे बाद रस्सियां फेंककर दोनों को हेलीकॉप्टर में देहरादून पहुंचाया गया। दोनों की हालत ठीक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि दोनों वहां से बद्दी के लिए रवाना भी हो गए हैं। एसडीएम राहुल कुमार ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हालांकि आपदा प्रबंधन से भी हेलिकॉप्टर की मांग की गई थी। लेकिन, इस बीच रितेश के भाई ने निजी चौपर भेजा। दोनों को रेस्क्यू कर देहरादून पहुंचाया गया है।
फिलहाल चूड़धार की यात्रा पर न जाएं लोग ः राहुल कुमार
एसडीएम राहुल कुमार ने बताया कि चेकपोस्ट का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि फिलहाल चूड़धार की यात्रा पर न जाएं। जबकि प्रतिबंध हटने के बाद भी मौसम की स्थिति को भांप कर ही यात्रा पर जाना चाहिए।