अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा दून के टोका क्षेत्र में गेहूं की फसल पीली पड़ गई है। ऐसे में गेहूं में पीला रतुआ-तेला रोग होने की आशंका बढ़ने लगी है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। पांवटा के नमी वाले क्षेत्रों में गेहूं की फसल को पीला रतुआ की संभावनाएं रहती हैं। पांवटा क्षेत्र निवासी किसान धर्मपाल सिंह, भजन चौधरी, रामस्वरूप, मिलखी राम, चंद्रशेखर और रणजीत सिंह का कहना है कि किसान पीला रतुआ रोग फैलने की आशंका से चिंतित हैं। किसानों ने बताया कि टोका, गुलाबगढ़ और कुंडियों के सिंचित क्षेत्रों में पीला रतुआ और तेला रोग के पनपने का भय किसानों को रहता है। पिछले दिनों बीच-बीच में बारिश हो रही है। पांवटा दून क्षेत्र के गांवों के कई खेतों में पानी रुका रहता है। इस रोग से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगती है। किसानों का कहना है कि तेला रोग में एक छोटा कीट पत्तों पर चिपक कर रस चूस लेता है। लिहाजा, फसल बढ़ने से रुक जाती है। गेहूं फसल के किसी रोग के चपेट में आने से पैदावार भी प्रभावित होती है। उधर, धौलाकुआं पर्वतीय कृषि अनुसंधान एवं प्रसार केंद्र के पादप रोग प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश ने कहा कि इस तरह के रोग की अभी तक क्षेत्र से शिकायत नहीं पहुंची है। पत्तों का पीला होना ही पीला रतुआ के लक्षण नहीं हैं। पीला रंग होने के कारण फसल में पोषक तत्वों की कमी, जमीन में नमक की मात्रा ज्यादा होना और पानी का ठहराव भी हो सकता है।
क्या है पीला रतुआ
पीला रतुआ रोग में गेहूं पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले रंग की धारी दिखाई देती है जो धीरे-धीरे पूरी पत्तियों को पीला कर देती है। पीला पाउडर जमीन पर गिरा देखा जा सकता है। पहले यह रोग खेत में 10-15 पौधों पर एक गोल दायरे में शुरू होता है। यह बाद में पूरे खेत में फैल जाता है। तापमान बढ़ने पर पीली धारियां पत्तियों की निचली सतह पर काले रंग में बदल जाती हैं।