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अपने खर्चे पर खच्चरों-गाडिय़ों में पानी ढो रहे लोग

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पानी नहीं दे रहे नल - फोटो : अमर उजाला
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जगत सिंह तोमर
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शिलाई (सिरमौर)। भीषण गर्मी के बीच पेयजल न मिलने से सिरमौर जिले में हालात गंभीर हो गए हैं। ग्रामीणों को मीलों दूर प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। प्राकृतिक स्रोत भी सूखने लगे हैं। हालात ये हैं कि जिले में लगभग 80 पेयजल योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पेयजल के लिए परेशान हैं। लोगों को अपने पशुओं को भी पीने के पानी का प्रबंध करना मुश्किल हो गया है। कुछ लोग जहां निजी गाड़ियों से पानी ढो रहे हैं, वहीं कुछ लोग घोड़े-खच्चरों से पानी ढोकर ला रहे हैं।
जिले के क्यारी, कांगर घूंड, देवका पुड़ला, बनी बखौली, मेहल प्रीतनगर, साधना घाट, क्याड़ी, कनून पट्टा कुफ़ड़, मेहंदों बाग, गेलो सड़सार, ठाकुरद्वारा, गलाना बेलगी, सिरमौरी मंदिर, बंबियार बढ़ियार, सरोल बसेच, जयहर, टिक्करी, अगरीवाला, रुदाना में भी पानी का संकट है। गर्मी से प्रभावित कुल 79 योजनाओं में से 19 योजनाओं में पानी न के बराबर रह गया है।
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पश्मी गांव के अमित चौहान, पूर्व प्रधान जगत चौहान, विनोद कुमार, दिनेश कुमार, गीता राम, बलदेव सिंह, नेत्र सिंह, अमर सिंह, रामभज ने बताया कि पहले गांवों को बालीकोटी प्रवाह योजना से पानी मिल रहा था। उस दौरान स्थिति नियंत्रण में थी। अब नई योजना से जोड़ने के बाद पानी का संकट गंभीर हो गया है। ग्रामीण दो किलोमीटर दूर भद्रपुर से पानी ढो रहे हैं। सुबह चार बजे से यहां बर्तनों की लाइनें लग रहीं हैं।
घासन गांव के खतर सिंह, कांशी राम, पंच राम, भगत सिंह, कंवर सिंह, अतर सिंह ने बताया कि जिनके पास अपने घोड़े व खच्चर नहीं हैं वह छोटी गाड़ियों से पानी ला रहे हैं। इसका खर्च 500 से 600 रुपये बैठ रहा है।
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उधर आईपीएच उपमंडल शिलाई के एसडीओ नितिन चुनोरी ने बताया कि किसी भी पंचायत से टैंकर की मांग नहीं आई है। प्राकृतिक स्रोतों का पानी सूखने से योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। इससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।
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