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निर्धन परिवार की बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे पट्टाधारक: बड़ालिया

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अमर उजाला ब्यूरो
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नाहन (सिरमौर)।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अब खनन पट्टा धारकों को खनन वाले क्षेत्रों में वनीकरण करना अनिवार्य होगा। वहीं खानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए शौचालय का निर्माण करना भी खनन पट्टाधारकों की जिम्मेदारी होगी। नए खनन पट्टे की पर्यावरण स्वीकृति प्रदान करने के लिए आयोजित जिला स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त सिरमौर बीसी बडालिया ने कहा कि यदि खनन क्षेत्र में कोई शिक्षण संस्थान पड़ता है तो वहां भी शौचालय निर्मित करवाना होगा।

उपायुक्त ने कहा कि खनन पट्टे धारकों को संबंधित क्षेत्र के साथ लगते गांव में निर्धन परिवार की एक बेटी की पढ़ाई का सारा खर्च वहन करना होगा, जिससे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को और बल मिल सके।
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उन्होंने कहा कि खनन पट्टे धारकों को खनन आदि का कार्य वैज्ञानिक ढंग से करना होगा ताकि खनन से संबंधित क्षेत्र की पेयजल व अन्य योजनाएं प्रभावित न हों। उपायुक्त ने कहा कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशानिर्देश के अनुसार उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण का गठन किया गया है और इस समिति को लघु खनिज खानों की पांच हेक्टेयर भूमि तक की स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि बैठक में जिला सिरमौर में आठ नए खनन पट्टों और दो पुराने खनन पट्टों के विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने पर गहनता से चर्चा की गई।
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उन्होंने कहा कि खनन एवं पुलिस विभाग द्वारा खनन माफिया पर अंकुश लगाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करना चाहिए। इस अभियान को निरंतर जारी रखा जाए। माइनिंग वाले क्षेत्रों में निगरानी को सुदृढ़ किया जाए ताकि खनन माफिया द्वारा किए जा रहे अवैध खनन पर पूर्णतया अंकुश लग सके। इससे पहले जिला खनन अधिकारी सुरेश भारद्वाज ने बैठक में आए सभी अधिकारियों का स्वागत किया और बैठक में क्रमवार माइनिंग संबंधी मुद्दों को प्रस्तुत किया।
इस मौके पर एसडीएम नाहन कृतिका कुल्हारी सहित वन, आईपीएच व खनन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
 
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