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अदरक के दामों में उछाल से सौंठ कारोबार विलुप्त

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अमर उजाला ब्यूरो
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ददाहू (सिरमौर)।
जिला सिरमौर के साथ-साथ ददाहू के नाम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान दिलाने वाला सौंठ का कारोबार विलुप्त हो गया है। करीब दो दशक पूर्व ददाहू में बड़े पैमाने पर सौंठ का कारोबार होता था जिसे देश की नामी मंडियों में पहुंचाया जाता था। साथ ही देश भर के जाने माने व्यापारी भी सौंठ खरीदने ददाहू आते थे लेकिन अब इस कारोबार को जैसे ग्रहण सा लग गया है।

दो दशक पूर्व रेणुका क्षेत्र के सैकड़ों किसान व करीब दर्जनभर व्यापारी सौंठ का बड़े पैमाने पर कारोबार करते थे। उस दौरान अकेले ददाहू से ही 40 से 50 लाख रुपये का सौंठ का कारोबार होता था।
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स्वर्गीय लाला बाबू राम वालिया यहां सौंठ का सर्वाधिक कारोबार किया करते थे लेकिन सौंठ की ग्रेडिंग, छंटाई, भराई व सुखाई के कार्य में कड़ी मेहनत होने के कारण किसानों व आढ़तियों की अगली पीढ़ी ने सौंठ के धंधे से मुंह मोड़ लिया। सौंठ का कारोबार करने की बजाय किसान अब अदरक बेचना ही पसंद करने लगे हैं। इस कारण लाखों रुपये का सौंठ कारोबार खाक में मिल गया है। जबकि सौंठ को एक उत्तम औषधि माना जाता है।

सौंठ व्यापारियों का मानना है कि पिछले एक डेढ़ दशक के दौरान अदरक के दामों में भारी उछाल आया है। पहले अदरक के दाम मात्र 12 से 15 रुपये प्रति किलो के बीच ही रहते थे लेकिन अब अदरक 25 से 40 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। जबकि सौंठ के दामों में खास बढ़ोतरी नहीं हो पाई। सौंठ के वाजिब दाम न मिलने के कारण किसानों के साथ-साथ व्यापारियों ने भी धीरे-धीरे इस धंधे से मुंह मोड़ लिया।
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जिले के प्रसिद्ध खनन व्यवसायी वीके वालिया ने बताया की डेढ़ दशक पूर्व उनके पिता को जिंजर किंग के नाम से देश की मंडियों में जाना जाता था। उन्होंने ददाहू में सौंठ का एक लघु उद्योग भी स्थापित किया था लेकिन उनका यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। जिला या जिले के आसपास किसी भी स्थान पर यदि अदरक से संबंधित कोई उद्योग होता तो सौंठ के कारोबार को बचाया जा सकता था क्योंकि व्यापारी उस उद्योग में अपना सौंठ बेचकर लाभ कमा सकते थे।
 
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