अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सेहत का भगवान ही रखवाला है। हालात यह है कि गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए खोले गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्र महज शोपीस बनकर रह गए हैं। चिकित्सक नहीं होने की वजह से लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा। कहीं पर फार्मासिस्ट मरीजों की नब्ज टटोल रहे हैं तो कहीं हेल्थ वर्कर। यहां तक कि कई स्वास्थ्य उपकेंद्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हवाले छोड़ दिए गए हैं। हालात यह हैं कि अस्पतालों के बड़े-बड़े भवन खड़े हैं, लेकिन मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। कई अस्पतालों में ताले लगाने तक की नौबत आ गई है।
जिला सिरमौर के विभिन्न गांवों में पीएचसी खोली गई है लेकिन बिना स्टाफ के इनमें से कइयों में ताले लगाने की नौबत आ गई है। जिले की 14 पीएचसी बिना चिकित्सक के चल रही है। यहां फार्मासिस्ट ही लोगों के लिए डॉक्टर बन गए हैं।
जिले में स्वीकृत चिकित्सकों के 106 में से 29 पद रिक्त चल रहे हैं, जबकि फार्मासिस्टों के 57 में से 33 पद रिक्त हैं। इस वजह से जहां चिकित्सक है वहां फार्मासिस्ट नहीं है, तो जहां फार्मासिस्ट है वहां चिकित्सकों की सेवाएं नहीं मिल पा रही।
संगड़ाह खंड के अधीन 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा 38 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। 38 उपस्वास्थ्य केंद्रों में 39 पद रिक्त पड़े हैं जबकि 12 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हैं। दो सामुदायिक और 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों समेत 68 पद रिक्त पड़े हैं। कई अस्पतालों में डेपुटेशन से काम चलाया जा रहा है। सप्ताह में तीन दिन चिकित्सक एक अस्पताल तो तीन दिन दूसरे अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।
जिले की बनेठी, पराड़ा, जाखना, कमरऊ, बरोग बनेड़ी, रामपुर भारापुर, टिंबी, भवाई, मानगढ़, नारग, हाब्बन, गिन्नी में चिकित्सक नहीं है। इनमें से कइयों में ताले लटके हैं तो कहीं फार्मासिस्ट से काम चलाया जा रहा है।
बॉक्स के लिए----
टिंबी में नहीं डॉक्टर, पीएचसी में लटके ताले
शिलाई (सिरमौर)। अक्तूबर 2017 में टिंबी में खोली गई पीएचसी में अभी तक चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। यहां न डॉक्टर है न ही फार्मासिस्ट। उद्घाटन के बाद से यहां पर ताले लटके हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह पीएचसी केवल तीन दिन चली। उस दौरान भी यहां पर एक फार्मासिस्ट से काम चलाया गया लेकिन, बाद में फार्मासिस्ट ने नौकरी छोड़ दी और पीएचसी में ताले लटक गए। इस पीएचसी से बकरास, मिल्लाह, कोटि-उत्तराउ, कोटा-पाब, टिटियाना पंचायतों की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी थी। इस क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य उपचार के लिए शिलाई 15 किलोमीटर, कफोटा 12 किलोमीटर या पांवटा साहिब पहुंचना पड़ रहा है।
----------
सतौन में ग्लूकोस चढ़ाने के भी नहीं प्रबंध
सतौन (सिरमौर)। सतौन पीएचसी में चिकित्सक की तैनाती तो कर दी गई है लेकिन अन्य सुविधाओं का अभाव है। दस पंचायतों के केंद्र बिंदु सतौन में पीएचसी खुलने से लोगों को सहूलियत हुई है। मांग है कि संख्या के हिसाब से यहां कम से कम दो चिकित्सकों की तैनाती की जाए। यहां पर रोजाना 40 से 50 की ओपीडी है। अस्पताल में गारबेज पिट की सबसे गंभीर समस्या है। अस्पताल में मरीजों के लिए बिस्तरों का इंतजाम नहीं है जिस वजह से आपात स्थिति में यहां से मरीजों को रेफर करना पड़ता है। हालात यह है कि यहां पर ग्लूकोस चढ़ाने तक के पुख्ता प्रबंध नहीं है।