अमर उजाला ब्यूरो
संगड़ाह (सिरमौर)।
सड़क किसी गांव की भाग्य रेखा मानी जाती है। सड़क के अभाव में जीना दुश्वार हो जाता है लेकिन यदि लोग स्वयं हिम्मत करें तो सरकारी मेहरबानी के बिना गांव तक सड़क का मुंह खुल सकता है। संगड़ाह क्षेत्र के डाहर गांव के लोगों ने ऐसी ही हिम्मत जुटाई है। ग्रामीणों ने अपने बलबूते गांव तक 250 मीटर वाहन योग्य कच्ची सड़क बनाकर संदेश दिया है कि वह स्वयं भी सड़क बना सकते हैं।
उपमंडल मुख्यालय संगड़ाह से महज दो किलो मीटर की दूरी पर बसे संगड़ाह पंचायत के डाहर गांव के लोगों ने अपनी भाग्य रेखा स्वयं बनाई है। लगभग 250 मीटर मार्ग स्वयं ही बना डाला। गांव तक सड़क पहुंचाने को अभी इतनी ही सड़क और बननी है लेकिन पथरीली जगह होने की वजह से यहां पैसा अधिक लगेगा। लिहाजा ग्रामीणों को अब सरकारी मदद की भी दरकार है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सत्तासीन होने वाली हर सरकार के समक्ष सड़क निर्माण की मांग रखी लेकिन किसी ने उनकी सुनवाई नहीं गई। जवाब यही मिला कि पहले जमीन की गिफ्ट डीड करवाओ उसके उपरांत निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा। लोगों की अपनी जमीन न होने के कारण मार्ग निर्माण का कार्य हर बार ठंडे बस्ते में चला जाता।
करीब 250 की आबादी वाले इस गांव के लिए बना फुटपाथ इतना तंग था कि उसमें कई बार छोटे बच्चे व राहगीर गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इसको देखते हुए गांव के लोगों ने आपसी सहभागिता से पहले फुटपाथ को ठीक किया, उसके उपरांत जेसीबी मशीन से करीब 250 मीटर जीप योग्य सड़क बना दी। जबकि इतना मार्ग बनना अभी शेष है। उसके बाद गांव तक गाड़ी पहुंच पाएगी। संगड़ाह गांव के अनिल कुमार, सुरेश कुमार, भीम सिंह व पूर्व प्रधान दलीप सिंह का लोगों ने आभार जताया।
नवयुवक मंडल के प्रधान कृष्ण शर्मा ने बताया कि गांव तक सड़क नहीं होने के कारण लोगों को दिक्कत हो रही थी। कई बार सरकार से गुहार लगाई गई, किंतु कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बैठक कर स्वयं सड़क बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए पहले श्रमदान किया गया, फिर जेसीबी लगाने की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए ग्रामीणों ने प्रति परिवार 2500 रुपये एकत्रित किए और सड़क कार्य शुरू किया।