महाशिवरात्रि आज या कल, शिवभक्तों में रही असमंजस
नाहन शहर के कई शिवालयों में पसरा सन्नाटा, कई मंदिरों में हुआ जलाभिषेक
विद्वानों के मत और कलेंडर के कारण रही उहापोह की स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
महाशिवरात्रि पर्व को लेकर कई शिवभक्त असमंजस की स्थिति में रहे। लगभग सभी कलेंडरों में महाशिवरात्रि का पर्व 14 फरवरी दर्शाने की वजह से भी शिवभक्त यह तय नहीं कर पाए कि मंगलवार को इस पर्व को मनाया जाए या फिर कलेंडर के अनुसार बुधवार को। सुबह के समय कई शिवालयों में भीड़ नहीं जुट पाई। इक्का दुक्का शिव भक्तों ने शिवालयों में जलाभिषेक किया। हालांकि, दिन के समय कुछ एक मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ जुटना शुरू हुई।
नाहन के प्रसिद्घ पौड़ीवाला शिव मंदिर में मंगलवार को बहुत की कम श्रद्घालु भोलेनाथ के दर्शनों के लिए पहुंचे। इसके अलावा अन्य मंदिरों में भी काफी कम भीड़ देखने को मिली। कई शिवभक्तों ने पंडितों की राय लेने के बाद मंगलवार को ही महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत रखे लेकिन सभी विद्वान पंडितों की राय भी महाशिवरात्रि को लेकर एक जैसी नहीं थी।
कई श्रद्घालुओं की नजरें कलेंडर पर पड़ने के बाद महाशिवरात्रि पर्व पर असमंजस बरकरार रहा। हालांकि, विद्वानों का मानना है कि महाशिवरात्रि के लिए चतुर्दशी होना जरूरी है। मंगलवार को त्रयोदशी थी। चतुर्दशी मंगलवार रात को 10 बजकर 37 मिनट से बुधवार 12:47 तक है। लिहाजा जिन शिवभक्तों ने त्रयोदशी में व्रत का पालन किया उनके लिए मंगलवार रात को शिव का जागरण आदि करना जरूरी है।
महाशिवरात्रि के लिए चतुर्दशी का महात्मय है। उधर, विद्वान पंडित सर्वेश नागरवैदिक ने बताया कि महाशिवरात्रि का व्रत असल में बुधवार को होगा लेकिन मंगलवार को व्रत का पालन करने वाले शिवभक्त यदि रात को चतुर्दशी लगने और शिव के जागरण का हिस्सा बनेंगे तो त्रयोदशी में रखे व्रत का भी उनके लिए लाभ होगा। हालांकि, कई शिव भक्त बुधवार को भी महाशिवरात्रि मनाएंगे। बहरहाल, शिवभक्तों में अलग-अलग मतों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। कइयों ने मंगलवार को ही महाशिवरात्रि मनाई तो कई बुधवार को व्रत आदि रखने के इच्छुक रहे।
------------हितेश शर्मा