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मेडिकल कॉलेज नाहन का दर्जा बढ़ा पर सुविधाएं नहीं

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हितेश शर्मा
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नाहन (सिरमौर)।
नाम बड़े और दर्शन छोटे...। इस कहावत को डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज चरितार्थ कर रहा है। मेडिकल कॉलेज का दर्जा होते हुए भी अस्पताल में मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। एक माह के भीतर ही मेडिकल कॉलेज में नवजात की दूसरी मौत हो चुकी है। हालांकि, कई तरह की अव्यवस्थाओं को लेकर मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में रहता है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के सारे दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। यूं कहें कि मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद अब यहां क्षेत्रीय अस्पताल जैसी सुविधाएं भी मरीजों को नहीं मिल रही हैं।

सिविल अस्पताल की स्थिति भी मेडिकल कॉलेज से कहीं बेहतर है।
शुक्रवार को नवजात की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, नवजात की मौत का यह पहला मामला नहीं है। करीब एक माह पहले ही मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत का मामला सामने आ चुका है। यह अलग बात है कि उस दौरान मेडिकल कॉलेज में कोई शिशु रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं था।
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नवजात की मौत के कुछ ही दिन बाद यहां पर शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती की गई लेकिन शुक्रवार को फिर से एक और नवजात ने संसार देखने से पहले ही अपनी आंखें बंद कर दीं। मेडिकल कॉलेज इस समय विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। गर्भवती महिलाओं को समय पर स्री रोग विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिल पातीं। इस मेडिकल कॉलेज में एक दिन में सिर्फ 30 गर्भवती महिलाओं का ही स्वास्थ्य जांचा जा रहा है। जबकि, प्रतिदिन ओपीडी सैकड़ों महिलाओं की रहती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए बैठने की उचित सुविधा का प्रबंध तक नहीं किया गया है। गायनी ओपीडी के बाहर दर्जनों महिलाएं कभी दीवार पकड़कर अपनी बारी का इंतजार करती हैं तो कई फर्श पर बैठकर। अन्य ओपीडी का भी यही हाल है।
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बॉक्स के लिए---
एमसीआई के नियमों का पूरा नहीं कर रहा मेडिकल कॉलेज
भले ही क्षेत्रीय अस्पताल नाहन को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल गया हो लेकिन एमसीआई के दौरे के दौरान जितना मेडिकल स्टाफ, पैरा मेडिकल स्टाफ व अन्य सुविधाएं टीम को दिखाई गईं उसके अनुसार कॉलेज में न तो आज तक स्टाफ की तैनाती हो पाई है और न ही मरीजों की सुविधाओं के प्रबंध किए गए। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी खल रही है। इसके साथ-साथ कॉलेज में फैकल्टी भी पूरी नहीं है। यह अलग बात है कि मेडिकल कॉलेज में दूसरा बैच चल रहा है।
 
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