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कालाअंब में बढ़ी बकरी के दूध की मांग

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अमर उजाला ब्यूरो
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कालाअंब (सिरमौर)
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब व इसके साथ सटे रिहायशी इलाकों और गांवों में डेंगू की चपेट में आए रोगियों के लिए बकरी के दूध की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। लोगों में ये धारणा है कि बकरी का दूध डेंगू के रोगियों के लिए काफी लाभदायक होता है।

जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक सिर्फ औषधीय चिकित्सा से ही डेंगू का इलाज संभव है। इसी धारणा के मद्देनजर डेंगू पीड़ितों के परिजन बकरी के दूध की तलाश में आसपास के इलाकों में भटक रहे हैं और यदि कहीं दूध मिल भी रहा है तो वह 700 से 1000 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है।
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इलाका वासियों में प्रवासी व स्थानीय लोगों में रामस्वरूप, महेश, मदन, नरेंद्र, व रमेश ने बताया कि बकरी का दूध डेंगू बुखार में लाभदायक होता है। जबकि अस्पतालों से भी पीड़ितों का इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि जिनके पास दूध मिलता है वो लोग बहुत ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। हरियाणा के सीमावर्ती एक दो गांवों से ही बकरी का दूध मिल रहा है जो कि लोगों की मांग के अनुरूप 700 से एक हजार रुपये प्रतिलीटर वसूले जा रहे हैं।


उधर, आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेश चौहान ने बताया कि डेंगू के मरीज को औषधीय चिकित्सा के साथ-साथ गाय का दूध भी नियमानुसार दिया जा सकता है। गाय के 250 मिलीलीटर दूध में चार गुना शुद्ध जल मिलाकर मुन्नका, खजूर व मुलैठी को बराबर मात्रा में लेकर दूध में उबालें और एक लीटर शेष रहने पर उसको दिन में थोड़ा थोड़ा करके रोगी को पिलाया जा सकता है। इसके अलावा डेंगू पीड़ितों के लिए रसदार फलों का सेवन भी लाभप्रद है।
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नारायणगढ़ अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रकाश व सीएमओ सिरमौर डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि मेडिकल साइंस में डेंगू का इलाज जरूरी दवाइयों से किया जाता है, बाकी लोग अपने स्तर पर खुद ही देसी नुस्खे आजमाते रहते हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज संभव है। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी दवाइयां भी बंटवाई गई हैं।
 
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