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दुकानदारों के कर्जदार हो गए जलवाहक, राशन देना भी किया बंद

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अमर उजाला ब्यूरो
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संगड़ाह (सिरमौर)।
जिला सिरमौर व शिमला की सीमा से सटी कुपवी तहसील की 6 पंचायतों में कार्यरत जलरक्षकों को उनके मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि जलवाहक अब दुकानदारों के भी कर्जदार हो गए हैं। कर्ज तले जलरक्षक इतने डूब गए हैं कि अब दुकानदारों ने भी राशन उधारी पर देना बंद कर दिया है। इससे जलरक्षकों को अपने परिवार का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
तहसील की चड़ोली, जुड़ू शिलाल, नौरा बौरा, बांदल कफलाह, मझोली व वावत पंचायत के जलरक्षकों को मार्च 2017 में अंतिम बार वेतन मिला था। इसके बाद इन कर्मचारियों ने आईपीएच व पंचायत कार्यालयों के कई चक्कर काटे लेकिन हर बार ही निराशा हाथ लगी। विभिन्न पंचायतों में कार्यरत संतोष समटा, बलबीर सनपाल्टा, प्रकाश चाकर, राजेंद्र छिंटा, लाल सिंह ठाकुर, सोहन सिंह व राकेश ठाकुर आदि जलरक्षकों ने बताया कि पिछले एक वर्ष से उन्हें मानदेय नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि अब दुकानदारों ने राशन देना भी बंद कर दिया है।
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दो विभागों के बीच फंसे जलरक्षक
दरअसल, जलरक्षक दो विभागों के बीच फंसकर रहे गए हैं। मात्र 1500 मासिक वेतन पाने वाले जलरक्षकों से कार्य पंचायतीराज विभाग करवाता है और वेतन का भुगतान आईपीएच विभाग करता है। वेतन के भुगतान के लिए भी इन कर्मचारियों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सरकार इनके वेतन का पैसा आईपीएच विभाग के हैड ऑफिस भेजती है। इसके बाद विभाग उपमंडल कार्यालयों में एलओसी भेजता है। इसके बाद आईपीएच विभाग पैसे को पंचायतीराज विभाग के पास जमा करता है। यह प्रक्रिया कई माह तक चलती है।
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एक वर्ष से नहीं आई एलओसी
उधर, आईपीएच के कनिष्ठ अभियंता प्रेम ठाकुर ने बताया कि मार्च 2017 के बाद एलओसी न मिलने के कारण कुछ पंचायतों के जलरक्षकों के वेतन का भुगतान रुका है। उन्होंने बताया कि पहले एलओसी उपमंडल कार्यालयों में आती थी, लेकिन अब हैड ऑफिस से पैसा सीधा पंचायतीराज विभाग को भेजा जा रहा है।
 
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