ददाहू (सिरमौर)।
धार्मिक पर्यटन केंद्र रेणुका जी इन दिनों विदेशी परिंदों से गुलजार हो गई है। मौसम में आए बदलाव के बाद यहां प्रवासी परिंदों की संख्या में इजाफा होने लगा है। करीब 373 प्रवासी परिंदों ने अभी तक रेणुका घाटी में अपना आशियाना बना लिया है। यदि ठंड अधिक बढ़ती है, तो इन परिंदों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
रेणुका झील में अभी तक 10 प्रजातियों के पक्षी डेरा डाल चुके हैं। इनमें दो प्रजातियां पहली मर्तबा यहां दिखाई दी है। पिछले वर्ष तक 7 या 8 प्रजातियों के पक्षी ही रेणुका में पहुंचते थे। रेणुका वेटलैंड का सुरक्षित, शांत और ठंडा वातावरण प्रवासी परिंदों को भा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्राउन क्रीक और नॉर्दन साउलर दो प्रजातियां रेणुका झील में पहली बार देखी गई हैं। आकाश मार्ग से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके ये पक्षी प्रतिवर्ष यहां पहुंचकर पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। इन पक्षियों की जल क्रीड़ाएं लोगों को रोमांचित कर रही हैं। यूरोप, चीन, भूटान, साइबेरिया, सऊदी अरब, अफगानिस्तान और मलेशिया आदि देशों से ये पक्षी लंबी उड़ान भर यहां पहुंचे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पक्षी यहां फरवरी के दूसरे सप्ताह तक रह सकते हैं। वन्य प्राणी विभाग ने पक्षियों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध कर रखे हैं। सीसीटीवी कैमरों से इन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। विशेष तौर पर वॉचर तैनात किए गए हैं ताकि पक्षियों को कोई नुकसान न पहुंचा सके।
क्या कहते हैं अधिकारी
वन्य प्राणी विभाग रेणुका के आरओ अश्विनी कुमार शर्मा ने बताया कि अभी तक 10 प्रजातियों के 373 पक्षी रेणुका पहुंच चुके हैं। जोकि रेणुका झील के अंतिम छोर पर जल क्रीड़ाएं करने में मशगूल हैं। इनके विचरण के लिए झील में विशेष टापू भी तैयार किए हैं। इस पर बैठकर वे आराम कर रहे हैं।
इन प्रजातियों ने डाला डेरा
रेणुका पहुंचे इन प्रवासी पक्षियों में अभी तक मेलाड 15, ब्राउन क्रीक, ग्रेट इगरिट और लिटिल कॉर्मोरेंट एक-एक, यूरेशियन कूट 20, ग्रेट कॉर्मोरेंट 6, स्माल इग्रिट 3, यूरेशियन मोहरण 320, नॉर्दन साउलर 2 और कॉमन टील 4 शामिल हैं। इसके अतिरिक्त साथ लगते जटोन बैराज में भी प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजातियां विचरण कर रही हैं।