महीनों से नहीं मिला वेतन, ईपीएफ का भी नहीं हिसाब
कालाअंब में फैक्टरी प्रबंधन की कारगुजारी से कर्मचारी हताश
श्रम विभाग से सीएम तक शिकायत करने पर भी नहीं मिला न्याय
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। कालाअंब में त्रिलोकपुर सड़क के पास चल रही एक फैक्टरी में कार्यरत कर्मचारियों को करीब तीन महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। जबकि, कुछ कर्मचारियों को बिना नोटिस के बाहर का रास्ता दिखा गया है। इतना ही नहीं, फैक्टरी प्रबंधन ने वेतन से ईपीएफ की कटौती के बावजूद ईपीएफ जमा नहीं करवाया। करीब पांच दर्जन कर्मचारियों ने फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ये आरोप लगाए हैं। नाहन में पत्रकार वार्ता बुलाकर सभी कर्मचारियों ने न्याय की गुहार लगाई है। कर्मचारियों का कहना है कि इस मसले का लेकर वे जिला के प्रशासनिक अधिकारियों, श्रम विभाग सहित ईपीएफ विभाग से पत्राचार कर चुके हैं। इसे लेकर कई बार शिकायत भी की गई। यहां तक कि मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पत्रकार वार्ता में अरुण वालिया, मनोज, वीके शर्मा, बलवंत सिंह, कैप्टन बेली राम, ओंकार वर्मा, रामस्वरूप आदि ने बताया कि वे करीब दस सालों से कार्य कर रहे हैं। उनके वेतन से ईपीएफ की कटौती की जा रही है, लेकिन विभाग के पास जमा नहीं हो रही। यहां तक कि ईएसआई का भी यही रवैया है। उनका कहना है कि कर्मचारियों का वेतन तीन महीने से नहीं दिया गया है। जबकि, मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को भी कई महीनों से वेतन नहीं मिला। वे नौकरी छोड़ने को तैयार हैं लेकिन, उनकी ग्रेचअुटी और अन्य लाभ उन्हें मिलने चाहिए। कंपनी इसमें टालमटोल कर रही है। उनके अनुसार नवंबर 2018 से कर्मचारियों को किसी भी तरह का वेतन नहीं मिल रहा है। इस वजह से बच्चों की फीस, घर का राशन, कमरे का किराया आदि देना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को उन्होंने उपायुक्त को भी इस संदर्भ में शिकायत की है। उन्होंने श्रम विभाग को इस बारे जांच के आदेश दिए लेकिन, श्रम विभाग ने भी कंपनी का चालान काटकर महज औपचारिकता निभाई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि कंपनी प्रबंधन की इस कारगुजारी से दुखी होकर वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने को विवश हैं। उधर, कंपनी में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों को भी कंपनी ने बिना नोटिस बाहर निकाल दिया है। उनके स्थान पर किसी अन्य सुरक्षा एजेंसी को कार्य दिया जा रहा है। इधर, जिला श्रम अधिकारी सीएम शर्मा ने शिकायत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त के माध्यम से उन्हें जांच के आदेश हुए हैं। शुक्रवार को श्रम निरीक्षक को भेजकर वेतन जारी करने बारे एक सप्ताह का नोटिस दिया जाएगा अन्यथा मामला अदालत में दायर किया जाएगा। अक्तूबर तक का वेतन कंपनी ने दे दिया है।