सतौन (सिरमौर)।
शिलाई विधानसभा के अंतर्गत भीतरकुई गांव तक सड़क पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही है। सड़क के अभाव में यहां के ग्रामीण पलायन को विवश हैं। सोमवार को उपायुक्त सिरमौर के आदेशों पर विभिन्न विभागों की एक टीम भीतरकुई पहुंची। जहां ग्रामीणों से मंथन कर न केवल सड़क खोलने की संभावनाएं तलाशी गई, बल्कि गांव की अन्य समस्याएं भी सुनीं गईं।
टीम ने ग्रामीणों को बताया कि बागवानी विभाग की ओर से मनरेगा के द्वारा यहां पर आंवला और नींबू के पौधे लगाने में ग्रामीणों की मदद की जाएगी। विभाग कोटगा में ही ग्रामीणों का अदरक 50 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से खरीदेगा।
शिलाई के भीतरकुई गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। गांव के लोग पलायन को विवश हैं। ‘अमर उजाला’ ने ‘सिरमौर के गांव में न सड़क, न स्कूल, घर-बार छोड़ रहे लोग...’शीर्षक के साथ बीते साल छह फरवरी को प्रमुखता से यह मामला उठाया था। अब गांव तक विभागीय टीम पहुंचने से लोगों को समस्याएं दूर होने की उम्मीद है।
ग्रामीणों ने टीम के समक्ष तमाम समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने ठेठ पहाड़ी लहजे में कहा...साहब रोड़ो के डोरो के गांव दे पोउणे भी नी आंदेे...। यानि सड़क नहीं होने के कारण गांव में मेहमान भी नहीं आते। ग्रामीणों ने बताया कि 80 के दशक में भीतरकुई में विद्युत की सप्लाई पहुंचाई गई थी। उस समय भीतरकुई में 30 परिवार रहते थे। सड़क सुविधा न होने के कारण गांव से पलायन हो रहा है। इस समय मात्र 7 परिवार के 30 लोग ही गांव में रहते हैं। टीम में बीडीओ के अलावा लोनिवि के अधिशासी अभियंता शिलाई, सहायक अभियंता लोनिवि सतौन, बागवानी, कृषि के साथ ही पंचायत के अधिकारी भी शामिल थे।
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लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीके उप्रेती ने बताया कि गांव को सड़क पहुंचाना आसान नहीं है। तीन किलोमीटर से ज्यादा सड़क वन क्षेत्र में आ रही है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट उपायुक्त सिरमौर को भेजी जाएगी।
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विधायक प्राथमिकता में डालेंगे सड़क : हर्ष
शिलाई के विधायक हर्ष वर्धन चौहान ने बताया कि भीतरकुई गांव को दुबारा बसाने के लिए हर संभव कार्य किए जाएंगे। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए विधायक प्राथमिकता के तहत प्रपोजल बनाई जाएगी। शिलाई के इस प्रकार कई के अन्य गांवों को भी सड़क से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे।