अमर उजाला ब्यूरो
राजपुर (सिरमौर)।
इस साल गेहूं की बिजाई महंगी हो गई है। गेहूं के बीज पर मिलने वाली सब्सिडी पर कृषि विभाग ने कैंची चला दी है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ गया है। पिछले वर्ष किसानों को गेहूं के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान मिला था। जबकि इस साल 50 प्रतिशत की बजाय महज एक हजार रुपये प्रति क्विंटल अनुदान दिया जा रहा है। हालांकि, सीड विलेज योजना के तहत 50 फीसदी अनुदान का प्रावधान है लेकिन यह अनुदान भी महज 20 किलोग्राम बीज की खरीदारी तक ही सीमित कर दिया है यानी 20 किलोग्राम से अधिक बीज खरीदा तो अनुदान 50 फीसदी नहीं मिलेगा।
पांवटा ब्लॉक के कृषि विक्रय केेंद्र से लगभग 1500 क्विंटल गेहूं का उपचारित बीज वितरित हो चुका है। इस बार सरकार ने गेहूं बीज के दाम 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए हैं। जबकि पिछले वर्ष यह दाम 2600 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल था। किसानों को गत साल विभाग ने 50 फीसदी अनुदान दिया था लेकिन इस साल यह अनुदान सिर्फ एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। जबकि अगेती किस्म के बीज पर मिलने वाला अनुदान भी 50 फीसदी तो यथावत रखा गया है, परंतु इसकी खरीद सीमा महज 20 किलोग्राम निर्धारित की गई है।
कृषि विषयवाद विशेषज्ञ साहब सिंह ने बताया कि अकेले पांवटा में 16,700 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। कृषि विभाग के पास 2500 क्विंटल उपचारित बीज उपलब्ध हैं। हालांकि, निजी दुकानों से भी बीज खरीदा जा रहा है। सरकार ने लगभग निर्धारित कीमत 2700-2800 रुपये पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल छूट दी है। सीड विलेज योजना के तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी की दर से पंजीकृत किसानों को बीज वितरित किया जा रहा है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. विद्यासागर ने कहा कि जिले में करीब 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है जिसमें 8000 क्विंटल के लगभग बीज की खपत होती है। इसके लिए जिले में करीब 20 विक्रय केंद्र स्थापित हैं। हालांकि कई किसान हरियाणा, उत्तराखंड एवं निजी दुकानों से भी बीज खरीदते हैं।
बॉक्स के लिए---
यह बीज हैं विभाग के पास उपलब्ध
वीएल - 829
पीबीडब्ल्यू-621
डीबीडब्ल्यू-621-50
एचपीडब्ल्यू-349
एचपीडब्ल्यू-236
एचपीडब्ल्यू-1080
एचडी-2967
डब्ल्यूएच-1080
एचपीडब्ल्यू-236
बीबीडब्ल्यू-71
एचएस-542
एचएस-507
एचपीडब्ल्यू-211