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पांवटा के बहराल में उत्तराखंड के हाथियों का उत्पात

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अमर उजाला ब्यूरो
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के राजा जी पार्क से हाथियों का झुंड पांवटा की बहराल पंचायत में पहुंचकर उत्पात मचा रहा है। गेहूं और गन्ने की फसल को तहस-नहस करने के साथ ही रिहायशी इलाकों में हाथियों के पहुंचने से लोगों में दहशत का माहौल है। बहराल और सतीवाला गांव में हाथियों का सबसे अधिक खौफ है। महिलाएं खेतों और छोटे बच्चों को परिजन बाहर भेजने से कतराने लगे हैं। दो माह से हाथियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ग्राम पंचायत बहराल की प्रधान जगजीत कौर, उप प्रधान राजेंद्र सिंह, वार्ड सदस्य इकबाल कौर, जरनैल सिंह, नानकू राम, त्रिलोक सिंह, प्रोमिला देवी, रिश्म कौर और राजकुमार का कहना है कि ग्रामीण खौफजदा हैं। रात के समय तो घरों से बाहर निकालना खतरनाक साबित हो सकता है। बहराल पंचायत के सतीवाला और बहराल गांव में पहुुंचे इन हाथियों ने फसलों को तहस-नहस कर दिया है। गेहूं और गन्ने की फसल को सबसे अधिक क्षति हुई है। हाथी जंगल में छोटे पेड़-पौधों को भारी नुकसान पहुंचा रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष दिसंबर से जनवरी के बीच उत्तराखंड के राजा जी नेशनल पार्क से युमना नदी पार करके हाथी पांवटा क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। इस बार दिसंबर से हाथी आना शुरू हो गए हैं। अब रात के समय ग्रामीणों ने 4-5 हाथियों को गांव के आसपास देखा है। हाथी बहराल पंचायत क्षेत्र में तांडव मचा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी सूचना वन विभाग और नेशनल पार्क सिंबलवाड़ा के अधिकारियों को दी है लेकिन, वन विभाग ने हाथियों को भगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधीश सिरमौर और डीएफओ से गुहार लगाई है कि हाथियों के आतंक से निजात दिलाई जाए। उधर, डीएफओ पांवटा कुनाल एंग्रीश ने कहा कि वन विभाग की टीम स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से उत्तराखंड से बहराल पहुंचने वाले हाथियों को साथ लगते सिंबलवाड़ा नेशनल पार्क या फिर हरियाणा के कलेसर खदेड़ने में सहयोग करेगी। हाथियों को दूर जंगल क्षेत्रों में भगाने के लिए पटाखे चलाए जाते हैं।
गन्ने की खेती छोड़ चुके हैं कई किसान
बहराल ग्राम पंचायत की प्रधान जगजीत कौर, इकबाल सिंह और खुशहाल सिंह का कहना है कि हर वर्ष गन्नेे और गेहूं की फसल को हाथी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके चलते दर्जनों किसानों ने नकदी फसल गन्ने की खेती करना ही छोड़ दिया है। शाम ढलते ही हाथी खेतों में पहुंच जाते हैं। गन्ने, गेहूं, केले और फलदार पौधों समेत फसलों को भी नष्ट कर देते हैं।
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दो वर्ष पहले खेतों में मृत मिला था हाथी
बहराल में दो वर्ष पहले एक हाथी यमुना नदी किनारे लगते खेतों में संदिग्ध रूप से मृत मिला था। इसके बाद वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया था। आशंका जताई गई थी कि स्प्रे की गई फसल खाने से हाथी की मौत हो गई। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इसकी पुष्टि भी हो गई थी।
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