नाहन (सिरमौर)।
डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज में नए बैच के लिए चिकित्सकों की फौज खड़ी की जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं के हाल बेहाल हैं। कॉलेज की सीटी स्कैन मशीन इन दिनों खराब चल रही है। लगभग एक सप्ताह से अस्पताल में मरीजों के सीटी स्कैन नहीं हो रहे। इस वजह से मरीज निजी अस्पतालों में हजारों रुपये लुटाने को मजबूर हैं।
सूत्र बताते हैं कि कॉलेज की मशीन आउट डेटिड हो गई है। नई मशीन लेने की बजाय इसी को बार-बार ठीक करवाया जा रहा है। सालाना लगभग 15 लाख रुपये इस मशीन की मरम्मत पर ही खर्च हो रहे हैं।
नाहन दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील है। पांवटा, रेणुका, राजगढ़, ददाहू, शिलाई आदि इलाकों से यहीं के लिए मरीज रेफर किए जाते हैं लेकिन यहां पर यदि सीटी स्कैन की आवश्यकता पड़े तो उन्हें चंडीगढ़ का रुख करना पड़ता है। शहर में एक निजी अस्पताल के अलावा कहीं पर भी सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। ऐसे में लोग यहां भारी खर्चा वहन कर सीटी स्कैन करवाने को विवश हैं। अस्पताल में आपातकाल के दौरान सबसे बड़ी समस्या हो रही है।
हिमानी ने बताया कि एक दिन पहले ही उसके बेटे की तबीयत खराब हो गई। उनका बेटा खेलते-खेलते फर्श पर गिर गया था। इसके बाद उसे अस्पताल लेकर आए तो चिकित्सकों ने सीटी स्कैन करवाने की सलाह दी। सीटी स्कैन के लिए रेडियोलॉजिस्ट को फोन किया तो बताया गया कि मशीन खराब चल रही है। लिहाजा, उनके भारी खर्चा वहन कर निजी अस्पताल में सीटी स्कैन करवाना पड़ा।
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श्रेय लेने में आगे, सुविधा जुटाने में फिसड्डी नेता
मेडिकल कॉलेज नाहन में खुलने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में श्रेय लेने की होड़ मची रहती है। कांग्रेस इसे यूपीए सरकार की देन तो भाजपा केंद्र की मोदी सरकार की देन करार देते हैं। श्रेय लेने में हर पल दोनों ही दलों के नेता आगे रहे लेकिन नई सीटी स्कैन मशीन खरीदने का मामला किसी नेता ने नहीं उठाया। जबकि यहां चल रही मशीन बेहद पुरानी हो चुकी है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर कहते हैं कि करीब एक सप्ताह से मशीन खराब चल रही है। इसे ठीक करने वाली कंपनी को संपर्क किया गया है। वहीं, मंजूरी के लिए निदेशक को ईमेल भेजी गई है। निदेशक की मंजूरी के बाद ही मशीन को दुरुस्त किया जा सकेगा। क --------संजय भारद्वाज