नाहन (सिरमौर)।
भाजपा के डॉ. राजीव बिंदल ने नटनी के श्राप को बेअसर कर दिखाया है। करीब 19 साल बाद नाहन विधानसभा क्षेत्र की जनता जनार्दन ने प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने वाली भाजपा सरकार को अपना विधायक दे दिया है।
सत्तासीन सरकार के बिलकुल उलट नतीजे देने वाली नाहन विधानसभा ने 1998 के बाद पहली बार सत्ता के साथ चलकर अपना जनमत दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के पहले नाहन विधानसभा ने 2012 में भी डॉ. राजीव बिंदल को अप्रत्याशित वोटों से जीताकर विधानसभा भेजा था लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार काबिज हुई। 2007 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी लेकिन नाहन विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी कुश परमार विजयी हुए थे। वहीं, 2003 में प्रदेश में बनी तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में नाहन से लोजपा प्रत्याशी सदानंद चौहान व 1998 में प्रदेश में भाजपा की सरकार के वक्त भी नाहन में कांग्रेस के उम्मीदवार कुश परमार विजयी होकर विधानसभा पहुंचे थे। यही वजह थी कि इस विधानसभा में आज तक कोई मंत्री भी नहीं बन पाया।
हालांकि, वर्ष 1998 से पहले कुछ विधायक सत्ता पक्ष के जरूर चुने गए, लेकिन मंत्री नहीं बन सके। जनता पार्टी से जीतकर विधानसभा पहुंचे श्यामा शर्मा को ही एक बार मंत्री पद हासिल हो सका। अन्य नेता विधायक ही बनकर रहे। वैसे भी नाहन कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। यहां से अकसर कांग्रेस के ही विधायक बनें। जब-जब प्रदेश में कांग्रेस काबिज हुई तो विधायक किसी और दल के ही बनते रहे लेकिन इस बार डॉ. राजीव बिंदल की हवा में नाहन की जनता भी सरकार के साथ तर गई।
नाहन विधानसभा के लोग अकसर नाहन की सीट को नटनी के श्राप से जोड़ते रहे। यही नहीं जनपद सिरमौर की दूसरे विधानसभा क्षेत्रों से भी अधिकतर सत्तासीन सरकार के उलट ही नतीजे मिलते रहे। पिछले विधानसभा चुनाव में सिरमौर से भाजपा को तीन सीटें मिली थीं। जबकि एक सीट कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई लेकिन इस बार भाजपा के दामन में नाहन की सीट के साथ-साथ पच्छाद व पांवटा विधानसभा की भी सीटें मिली हैं। जबकि, कांग्रेस की झोली में रेणुका व शिलाई विधानसभा की दो सीटें गईं।