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अब स्कूल में झाड़ू नहीं लगाएंगे नौनिहाल

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सराहां (सिरमौर)। राजकीय प्राथमिक पाठशाला नारग में बच्चों से सफाई करवाने का मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद स्कूल प्रबंधन हरकत में आ गया है। शुक्रवार को स्कूल प्रबंधन समिति ने बैठक कर निर्णय लिया है कि स्कूल में बच्चों से सफाई नहीं करवाई जाएगी। लेकिन, अब सवाल यह है कि स्कूलों में सफाई कौन करेगा। नारग शिक्षा खंड के तहत ही लगभग 80 फीसदी स्कूलों में सफाई कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान को गति देने के सरकारी दावे कैसे पूरे हो पाएंगे। नारग स्कूल में बच्चों से सफाई करवाने के मसले को अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में ‘सराहां के नारग प्राथमिक स्कूल में नौनिहाल लगा रहे झाड़ू’ शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित किया था। इस मसले को लेकर शुक्रवार को नारग स्कूल में स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में एसएमसी ने निर्णय लिया कि बच्चे अब स्कूल में सफाई नहीं करेंगे। अब सवाल यह उठता है कि स्कूल के कमरों की सफाई बच्चे नहीं करेंगे तो कौन करेगा? क्योंकि स्कूल में पिछले दो साल से कोई भी सफाई कर्मचारी नहीं है। ऐसा स्कूल एक नहीं है कि जहां बच्चे सफाई करते हैं। सिरमौर के कई ऐसे स्कूल हैं जहां पर सफाई कर्मचारियों का अभाव है। ऐसे में सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के फलीभूत होने पर भी संशय की स्थिति बन गई है। स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान संजीव शर्मा ने बताया कि नारग पाठशाला में बच्चों से सफाई नहीं करवाई जाएगी। बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बीपीईओ नारग केशवा देवी ने बताया कि हाल ही में नारग में टूर्नामेंटों का आयोजन हुआ था। इससे कमरों में कचरा जमा हो गया था। खेल स्पर्धाओं के बाद कक्षाओं के संचालन के लिए यह सफाई करवाई जा रही थी। स्कूलों में जल वाहक व सफाई कर्मचारी की तैनाती की जानी चाहिए।
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शिक्षा के मंदिर में सफाई कर्मचारियों का नहीं होना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। 80 फीसदी स्कूलों में सफाई कर्मचारियों के नहीं होने से सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। शौचालयों का निर्माण तो सरकार ने जरूरी कर दिया है। लेकिन, इनकी सफाई के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करने के बारे में कोई कदम नहीं उठाए जा रहे।
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