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नारग प्राथमिक स्कूल में नौनिहाल उठा रहे झाड़ू

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नारग प्राथमिक स्कूल में नौनिहाल लगा रहे झाड़ू
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स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सफाई के लिए बच्चों की लगी है स्पेशल ड्यूटी
प्रार्थना सभा के दौरान स्टाफ के कमरे होते हैं साफ
देवराज शर्मा
सराहां (सिरमौर)। जरा ध्यान से देखिये...। यह कोई चौकीदार या फिर सफाई कर्मी नहीं हैं। ये स्कूल ड्रेस में मासूम बच्चियां हैं जो पढ़ने के लिए स्कूल जरूर आती हैं लेकिन यहां पढ़ाई नहीं बल्कि सफाई करवाई जाती है। स्कूल के कमरों से लेकर स्टाफ रूम, हेड टीचर के कमरे की सफाई के साथ-साथ स्कूल परिसर की सफाई का जिम्मा इन्हीं नौनिहालों के कंधों पर है। यह कोई एक आध दिन की बात नहीं है जब मासूम बच्चियों से ऐसे सफाई करवाई जाती हो। यह कार्य पिछले दो साल से हो रहा है। अंदाजा लगा लीजिए कि यहां कैसी पढ़ाई होती होगी जहां पढ़ने की उम्र में बच्चियों को स्कूल प्रबंधन सफाई कार्य में धकेल रहा है। जी हां! यह है पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की नारग प्राथमिक पाठशाला। यह मामला सामने आते ही स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। हजारों की पगार लेने वाले ये शिक्षक नौनिहालों को सफाई कार्यों की शिक्षा दे रहे हैं। अमर उजाला ने लाइव रिपोर्टिंग की तो यह सारा मामला खुद-ब-खुद सामने आ गया। मामला सामने आते ही स्कूल प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। अमर उजाला की रिपोर्टिंग के दौरान स्कूली बच्चों ने भी सारी पोल खोल दी। मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि प्रार्थना सभा से पहले नौनिहाल स्कूल के कमरों की सफाई के साथ-साथ स्टाफ के कमरे को चकाचक कर रहे थे। पता चला कि सफाई के लिए मासूमों की स्पेशल ड्यूटी लगाई गई है। इस कारण मासूमों को प्रार्थना सभा से भी वंचित रहना पड़ता है। रोजाना अभिभावक अपने बच्चों को साफ-सुथरी ड्रेस पहनाकर स्कूल भेजते हैं। उन्हें क्या पता कि बच्चे स्कूल में पढ़ाई के लिए जाते हैं या फिर सफाई करने। टीम ने बच्चों से पूछा तो बताया कि वे प्रार्थना सभा में भी नहीं जा पाते। इस स्कूल में पिछले दो साल से न चौकीदार और न ही कोई सफाई कर्मी है। लिहाजा, स्कूल प्रबंधन ने सफाई का जिम्मा भी बच्चों को सौंप रखा है।
क्या कहते हैं एसएमसी प्रधान
एसएमसी प्रधान संजीव शर्मा ने बताया कि वह बच्चों को स्कूल में पढ़ाई के लिए भेजते हैं न की सफाई कराने। सफाई कर्मचारी न होने के कारण पिछले दो सालों से लगातार बच्चों को सफाई करनी पड़ रही है। इससे पहले भी कई बार एसएमसी के माध्यम से सफाई कर्मचारी की मांग की गई है, लेकिन सफाई कर्मचारी तैनात नहीं किया गया। मुख्याध्यापक जितेंद्र सिंह ने बताया कि सफाई कर्मचारी न होने के कारण बच्चे अपने और स्टाफ के कमरे साफ करते हैं। समय-समय पर उच्च अधिकारियों से सफाई कर्मी की मांग की जाती रही है।
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स्कूलों में सफाई कर्मी के पद नहीं
शिक्षा उपनिदेशक उमेश बहुगुणा ने बताया कि सिरमौर के अधिकतर स्कूलों में सफाई कर्मचारी के पद नहीं हैं। जिन स्कूलों में सफाई कर्मचारी तैनात थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे पद नहीं भरे गए। सफाई की व्यवस्था हर स्कूलों में स्कूल प्रशासन और एसएमसी अपने हिसाब से करवा रही है।
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