अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। जिला सिरमौर के कई क्षेत्रों में अचानक आए अंधड़ और तूफान ने गुठलीदार फसलों को तबाह कर दिया। अंधड़ और तूफान ने गुठलीदार फलों की फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। इसके कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
जिले के कई क्षेत्रों में वीरवार शाम को आए आंधी तूफान ने सैनधार और गिरिपार क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। यहां हजारों बीघा भूमि पर लगे गुठलीदार फलों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। तूफान के कारण पेड़ों से फल झड़ कर खेतों में बिछ गए हैं। इन दिनों आडू, प्लम, लीची, खुमानी, आम और नाशपाती आदि फसलें लगभग तैयार हैं। किसान फलों के पकने का इंतजार कर रहे थे कि अचानक आए आंधी तूफान ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पेड़ों से फल पूरी तरह झड़कर खेतों में ही बिछ गए। जबकि, इस वर्ष पर्याप्त बारिश और बर्फबारी के कारण गुठलीदार फलों में मिठास की संभावना अधिक थी। आंधी तूफान ने सब कुछ तहस-नहस करके रख दिया। गिरिपार क्षेत्र के घंडूरी, सुंदरघाट, थियानबाग, रजाना, चाडना, चुनावी, पालर, अंधेरी आदि क्षेत्रों की हजारों बीघा भूमि में इन फसलों की बंपर पैदावार होती है। किसान कड़ी मेहनत, दवाइयों आदि के छिड़काव के बाद फलों की खेती को तैयार करते हैं लेकिन, इस वर्ष फल पकने से पहले ही तूफान से झड़ गए, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसान मित्र सिंह, नरेश कुमार, उजागर सिंह, सही राम, दीनदयाल, केवल राम, पदम सिंह, देवी राम, मंसा राम आदि ने बताया कि पिछले साल ओलावृष्टि ने उनकी फसल को तबाह कर दिया था। लेकिन, इस वर्ष आंधी तूफान ने गुठलीदार फसलों को बर्बाद कर दिया है। यहां तक कि सेब, अखरोट, नींबू, अनार के पेड़ भी तूफान की भेंट चढ़ गए हैं लेकिन, उद्यान विभाग किसी भी तरह से किसानों की मदद नहीं कर रहा है। उधर, उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र भारद्वाज ने बताया कि वर्षा और आंधी तूफान से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मंगवा ली गई है। बगीचे उगाने वाले किसानों के लिए बीज और दवाइयों पर ही सब्सिडी का प्रावधान है। लेकिन, फल टूट कर झड़ने पर किसी भी तरह के मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।