बडू साहिब में पारंपरिक खेती की दी जानकारी
दो दिवसीय कार्यशाला का किया गया आयोजन
राजगढ़ (सिरमौर)। इटरनल विश्वविद्यालय बडू साहिब में वातावरण से कृषि उत्पादकता पर पड़ रहे प्रभावों के संबंध में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के तलवंडी साबो के उप कुलपति डॉ. गुरमेल सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सम्मेलन का शुभारंभ अकाल अकादमी की संगीत विभाग की छात्राओं ने शबद-कीर्तन से किया। इसके बाद बडू साहिब विवि के उपकुलपति डॉ. एचएस धालीवाल ने वर्तमान और पुरानी पारंपरिक खेती की विस्तृत जानकारी दी।
मुख्यातिथि डॉ. गुरमेल सिंह ने कहा कि जो कृषि क्षेत्र में लोग हैं, उनका खेती के मामले में लाभ प्रतिशत कम हो गया है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों जैसे भारत में यह दर विकसित देशों के मुकाबले ज्यादा है। भारत में किसान खेती को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में रोजगार ढूंढ रहे हैं, जिससे बेरोजगारी का भी संकट देखा जा रहा है। डॉ. आनंद ने एचपीएसआईडी के संरचनात्मक और वित्तीय प्रयासों पर चर्चा की। डॉ. डीके शर्मा ने छात्रों से सीधे व्याख्यान में कहा कि सम्मेलन में प्रमुख नीतिगत निष्कर्ष निकले हैं जो हमें खाद सुरक्षा से पोषण सुरक्षा पर ध्यान देने, वातावरण के प्रभावों को कृषि नीति में स्थान देने, तकनीकी और विपणन प्रणाली में तेजी लाने के लिए जरूरी है। यूएचएफ नौणी के डॉ. रविद्र शर्मा, पंजाब कृषि विश्व विद्यालय के डॉ. जसदेव सिंह, डॉ. डीके ग्रोवर, डॉ. जेएम सिंह, डॉ. संजय कुमार ने पंजाब में कृषि की विविधता पर व्याख्यान दिया। इस मौके पर हमीरपुर, यूएचएफ नौणी यूनिवर्सिटी, पालमपुर यूनिवर्सिटी, शूलिनी यूनिवर्सिटी सोलन से क्रमश: उपनिदेशक जायका, आनंद प्राशर, डॉ. संजय वालिया, डॉ. जसदेव सिंह, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. वाईएस नेगी, डॉ. रविंद्र शर्मा आदि ने अपने शोध प्रस्तुत किए।