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गुगाभक्तों ने लोहे की जंजीरों से किए खुद पर प्रहार

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गुग्गाभक्तों ने लोहे की जंजीरों से किए खुद पर प्रहार
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गुग्गा नवमी पर धार्मिक उत्सव का आयोजन, सैकड़ों श्रद्धालु जुटे
गिरिपार की 125 पंचायतों में धूमधाम से मनाया पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
नौहराधार (सिरमौर)। गुग्गा नवमी का पर्व गिरिपार क्षेत्र में धूमधाम के साथ मनाया गया। सदियों पुरानी परंपराओं को बरकरार रखते हुए गुग्गा भक्तों (गुगावल) ने धार्मिक आस्था दिखाते हुए खुद को लोहे की जंजीर से पीटा। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। गिरिपार इलाके में कई जगह इस धार्मिक उत्सव का आयोजन किया गया। शिलाई क्षेत्र में गुगाल मेले आयोजित हुए तो नौहराधार इलाके में गुग्गा नवमी पर रात्रि जागरण। जंजीरों से खुद को पीटने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। आज भी गुग्गा भक्त इस धार्मिक परंपरा को संजोए हैं। खुद को जंजीरों से पीटना और आग से खेलना हालांकि, यह खतरनाक खेल है लेकिन गुग्गाभक्तों की अगाध श्रद्धा, आस्था और दैवीय शक्ति इस खेल को अधिक रोचक बना देती है। गुग्गा नवमी की पूर्व संध्या कृष्ण जन्माष्टमी की रात गुग्गा महाराज की माड़ी पर आयोजित इस धार्मिक उत्सव में दैवीय शक्ति से गुगावल खुद को जंजीरों से पीटते रहे। गुगावल के नाम से मनाए जाने वाले इस धार्मिक उत्सव में जब भक्त अपने आपको वजनदार जंजीरों से पीटते हैं तो इन्हें चोट तक नहीं लगती। मान्यता यही है कि जो लोग अशुद्ध होते हैं, वही ऐसे करतब से जख्मी होते हैं। इस दौरान क्षेत्र के सभी भक्त एक जगह इकट्ठा हए। लोहे की जंजीरों से बने गुग्गापीर के अस्त्र समझे जाने वाले दस किलो वजनी कौड़े को आग अथवा धूने में गर्म करने के बाद भक्तों ने खुद पर दर्जनों वार किए। इस दौरान भक्त आग में भी कूदते रहे। गुगावल शुरू होने पर पारंपरिक गारुडी कहलाने वाले पारंपरिक लोक गायकों ने विशेष सिरमौरी डमरू की ताल पर गुगापीर शिरगुल महाराज, रामायण और महाभारत वीर गाथाओं का गायन किया। गिरिपार में यह एक मात्र ऐसा पर्व है जो जातिगत बंधनों से ऊपर उठकर मनाया जाता है। यह पर्व मंगलवार दोपहर दो करीब बजे तक मनाया गया। मंगलवार को नारसिंह राजा के गूर ने तीन किलो आटे का बना मोटा रोट खाया, जो अचंभित करने वाली बात थी। गिरिपार क्षेत्र की करीब 125 पंचायतों में यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया।
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जन्माष्टमी और नवमी पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
गुग्गानवमी और जन्माष्टमी पर भक्तों के खेल के अलावा अधिकतर क्षेत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। हिमाचल प्रदेश के नामी पहाड़ी कलाकरों ने अपनी प्रस्तुति दी। भानरा गांव में हिमाचल के सुप्रसिद्ध कलाकार पहाड़ी कव्वाल फेम डॉ. मदन झाल्टा ने मंगलवार को दिन में अपनी प्रस्तुति दी। शिरगुल महिमा से कार्यक्रम की शुरुआत कर उन्होंने अपनी एलबम के गीत बोलो रे लोटू मोइना व माला रे मेरी प्यारी माला रे, उंदी चाले रेणुखे के रे गीतों से पंडाल में बैठे लोग झूम उठे। इसके अलावा प्लांह, नौहराधार, ठोंठा, गिरिपार क्षेत्र के अधिकतर गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश कएि।
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