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शिक्षकों के अभाव में 61 छात्रों ने बदला स्कूल

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राजपाल शर्मा
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सतौन (सिरमौर)।
ग्रामीण क्षेत्रों में घरद्वार पर शिक्षा मुहैया करवाने के दावे धरातल पर धड़ाम हो रहे हैं। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल के साथ कॉमर्स और विज्ञान संकाय शुरू तो कर दिए लेकिन शिक्षक नहीं होने के कारण अब ऐसे स्कूल खाली होने लगे हैं। ताजा मामला राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कफोटा का है। यहां शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए दाखिला लेने वाले और जमा एक से जमा दो में हुए करीब 61 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया है। जबकि इसका क्रम जारी है।
कफोटा से प्रमाणपत्र निकालकर छात्र नाहन या पांवटा में कमरे किराये पर लेकर पढ़ाई करने को विवश हैं जिससे अभिभावकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
शिलाई क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कफोटा में स्टाफ की भारी कमी है। विधानसभा चुनाव से पूर्व कई सालों से यहां पर्याप्त स्टाफ नहीं था। जबकि विधानसभा चुनाव के बाद भी शिक्षकों के तबादले होने से स्टाफ में कमी हुई है। जनवरी से अब तक स्कूल से छह शिक्षकों के तबादले हुए, लेकिन उनके स्थान पर कोई नहीं आया। इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।
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स्कूल में प्रवक्ताओं के एक दर्जन से अधिक पद खाली चल रहे हैं। स्कूल में इक्नोमिक्स, बायोलॉजी, फिजिक्स, राजनीतिक शास्त्र, अकाउंटेंसी, केमिस्ट्री, बिजनेस स्टडी, अंग्रेजी, आईटी, लैब असिस्टेंट के पद खाली चल रहे हैं। यहां तक कि स्कूल में प्रधानाचार्य की तैनाती तक सरकार ने नहीं की है। वर्तमान में स्कूल में जमा एक विज्ञान संकाय में 5 और जमा दो में 2 छात्र हैं। कॉमर्स में जमा एक में एक और जमा दो में दो छात्र हैं। जबकि आर्ट्स में 55 छात्र है। पिछले शैक्षणिक सत्र में जमा एक में 120 छात्रों ने दाखिला लिया था।
इस बार यहां 71 नए छात्रों ने ही दाखिला लिया। इनमें से भी अधिकतर ने अपने प्रमाण पत्र निकाल दूसरे स्कूलों का रुख कर लिया है। जमा एक में दाखिला लेने के बाद करीब 15 छात्रों ने स्कूल बदल दिया है। जमा दो में आर्ट्स में 79 में से 24 ने स्कूल छोड़ दिया। कक्षा में अब 55 छात्र ही स्कूल में रह गए हैं। कॉमर्स में 12 छात्रों में से दस और साइंस में 14 में से 12 छात्रों ने अपने प्रमाण पत्र निकाल दिए हैं। जल्द ही शिक्षक नहीं भेजे तो अन्य अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल से निकाल सकते हैं।
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उधर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य कांता शर्मा ने बताया कि अध्यापकों के कई पद रिक्त हैं। स्कूल से बच्चे माइग्रेशन करवा रहे हैं। शिक्षा उप निदेशक रमेश बहुगुणा ने बताया कि मामला संज्ञान में है। उच्च अधिकारियों को इस बारे अवगत करवाया जा रहा है।
 
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