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रेणुका वैटलेंड के जीर्णोद्धार को बना एक्शन प्लान

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41.25 लाख से संवरेगी रेणुका झील, एक्शन प्लान तैयार
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की टीम ने किया दौरा
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली रेणुका वेटलैंड के जीर्णोद्धार को लेकर एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री रेणुका जी के सुधार और विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं के तहत 41.25 लाख रुपये की राशि खर्च करेगा। एक्शन प्लान को मूर्त रूप देने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम शनिवार को रेणुका वेटलैंड का दौरा कर लौटी है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बृज गोपाल के नेतृत्व में रेणुका पहुंची सात सदस्यीय टीम में रेणुका वेटलैंड के प्रत्येक पहलुओं का जायजा लेने के उपरांत कुछ आवश्यक दिशा निर्देश और सुझाव भी दिए गए।
टीम का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक व भू-विशेषज्ञ डॉ. बृजगोपाल ने बताया कि रेणुका वेटलैंड में सुधार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। इस पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से विभिन्न मदों पर करीब 41.25 लाख रुपये खर्च किया जाएगा। इन सभी योजनाओं पर काम आरंभ हो चुका है। इन सभी कार्यों को 31 मार्च 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा। इस राशि को वन्य प्राणी विभाग के माध्यम से खर्च किया जा रहा है। इसमें रेणुका झील के आकर्षण और रख रखाव पर अधिक ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि रेणुका झील के सुधार को लेकर वन्य प्राणी विभाग की ओर से अब तक किए गए प्रयास काफी सार्थक साबित हुए हैं। इसके परिणाम स्वरूप रेणुका झील के अंतिम छोर पर पानी की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ गाद का समावेश काफी कम हुआ है। इससे यहां पहुंचने वाले विदेशी परिंदों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही झील के आकर्षण को भी चार चांद लगे हैं। वैज्ञानिकों की टीम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रवि शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. डीआर ठाकुर, एसके गुलेरिया, आरपी गुप्ता, समन चौहान आदि मौजूद रहे। वन्य प्राणी विहार रेणुका के आरओ अश्वनी कुमार ने एक्शन प्लान को लेकर किए गए कार्यों की जानकारी दी।
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पंजी खाले पर खर्च किए जाएंगे 15 लाख
ऐतिहासिक रेणुका झील के सौंदर्य को ग्रहण लगा रहे पंजीखाले के निर्माण पर 15 लाख की राशि खर्च की जाएगी। इस खाले से बहकर आने वाले मिट्टी की रोकथाम के लिए चेकडैम लगाए जाएंगे, जिससे रेणुका झील को खतरे से बचाया जा सके। वन्य प्राणी विभाग अब इस कार्य को लोनिवि के माध्यम से पूरा करवाएगा। इसमें तकनीकी राय से मिट्टी की रोकथाम के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। इससे पूर्व वन्य प्राणी विहार अपने स्तर पर ही पंजीखाले पर लाखों रुपये की राशि बर्बाद कर चुका है।
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