अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा क्षेत्र के निजी स्कूलों ने उनके साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। निजी स्कूलों का कहना है कि स्कूल एक तो पहले ही घाटे में चल रहे हैं ऊपर से सरकार नए-नए आदेश जारी कर उन्हें परेशान कर रही है। मामले को लेकर क्षेत्र के 21 निजी स्कूलों का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को एसडीएम पांवटा से मिला। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल बीएस सैनी, एनपीएस नारंग व एनएम वर्मा ने कहा कि निजी स्कूल सरकार से कोई सहायता लिए बिना बेहतर शिक्षा देने के लिए कृतसंकल्प हैं। निजी स्कूलों का परीक्षा परिणाम इसकी खुद गवाही दे रहा है। इसके बाद भी सरकार ने पड़ोसी राज्यों की नीति के विपरीत निजी स्कूलों की बसों को सार्वजनिक-वाणिज्य वाहन के समान मान कर उनपर भारी यात्री कर व टोकन टैक्स लगाए है। कई स्कूल पहले ही घाटे में चल रहे हैं। अब सरकार ने निजी स्कूल बसों में सीसीटीवी लगाने व प्रत्येक बस में बस कंडक्टर के साथ अतिरिक्त महिला कर्मचारी तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
निजी स्कूलों में वर्दी, पाठ्य पुस्तकों व सामग्री सुविधा के प्रति भी माफिया जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना उनको आहत कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह सरकारी कर्मचारियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने का कानून बनाए। साथ ही सीसीटीवी कैमरा यदि निजी स्कूलों में जरूरी किया जाए तो सरकारी स्कूलों में भी इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।
उधर, एसडीएम पांवटा एलआर वर्मा ने कहा कि निजी स्कूलों का ज्ञापन मिला है जिसे सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
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