नाहन। -सिरमौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारी दावों का दम निकल रहा है। दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में खोली गई पीएचसी में कहीं फार्मासिस्ट तो कहीं हेल्थ वर्कर मरीजों की नब्ज टटोल रहे हैं। अस्पतालों के बड़े-बड़े भवन खड़े हैं, लेकिन मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। सोमवार को ‘अमर उजाला’ ने जिला के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचकर निरीक्षण किया। कई पीएसी में ताले लटके हुए पाए गए तो कहीं फार्मासिस्ट दवाइयां देते हुए देखे गए।
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सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने माना कि कई स्थानों में चिकित्सक नहीं होने से दिक्कतें हो रही है। चिकित्सकों की कमी के बारे में हर महीने आला अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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डेपुटेशन के सहारे राजपुर पीएचसी
राजपुर (सिरमौर)। समय 11:10 बजे, स्थान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर। अस्पताल के बाहर महिलाएं एवं बुजुर्ग रोगी चिकित्सक के इंतजार में खड़े हैं। पूछने पर बताया कि 10 बजे से पहले यहां पहुंचे हैं। अभी तक चिकित्सक नहीं आए। विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली तो बताया गया कि तीन महीने से चिकित्सालय डेपुटेशन के सहारे पर चल रहा है। परिसर में एक व्यक्ति मरीजों की नाड़ी-नब्ज देखकर दवाइयां दे रहा था। करीब जाकर पूछा तो बताया कि वह आउट सोर्स पर रखा फार्मासिस्ट है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर साहब नहीं आ रहे हैं तो मैं ही पीड़ित रोगियों को दवाई की खुराक दे रहा हूं। देखते-देखते वहां मरीजों की भीड़ जुट गई। एक कर्मचारी ने बताया कि आज कोई भी डॉक्टर नहीं आएंगे जिसे सुनकर कई मरीज मायूस होकर लौटना शुरू हो गए। कुछ निजी क्लीनिक के लिए निकल पड़े, तो कुछ पांवटा व विकासनगर के लिये चले गए। रोजाना 60-70 मरीज आते हैं। सोमवार को रोगियों में सुंदर सिंह, किरण देवी , बिला देवी, कंठीराम, वीना, राकेश, नीलम, संजू, कांशीराम, मुकेश, गुनगुन, मनन, संदीप शर्मा आदि ने बताया कि यहां कई सालों से चिक्त्सिकों की कमी है। दो चिकित्सकों, एक फार्मासिस्ट, 2 चतुर्थ कर्मचारी के पद रिक्त पड़े हैं।
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टिंबी में नहीं डॉक्टर, पीएचसी में लटके ताले
शिलाई (सिरमौर)। अक्तूबर 2017 में टिंबी में खोली गई पीएचसी में अभी तक चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। यहां न डॉक्टर है और न ही फार्मासिस्ट। उद्घाटन के बाद से यहां पर ताले लटके हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह पीएचसी केवल तीन दिन चली। उस दौरान भी यहां पर एक फार्मासिस्ट से काम चलाया गया लेकिन बाद में फार्मासिस्ट ने नौकरी छोड़ दी और पीएचसी में ताले लटक गए। इस पीएचसी से बकरास, मिल्लाह, कोटि-उत्तराउ, कोटा-पाब, टिटियाना पंचायतों की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी थी। इस क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य उपचार के लिए शिलाई 15 किलोमीटर, कफोटा 12 किलोमीटर या पांवटा साहिब पहुंचना पड़ रहा है। क्षेत्र के सुरेंद्र सिंह, बीर सिंह शर्मा, अत्तर ठाकुर, पंचायत प्रधान चमेली देवी, उप प्रधान जगत सिंह, व्यापार मंडल प्रधान प्रदीप शर्मा, चंद्रमणि ठाकुर, ने बताया कि मुफ्त में पीएचसी को भवन भी उपलब्ध करवाया गया है लेकिन सरकार स्टाफ उपलब्ध करवाने में असफल रही। इस संबंध में पंचायत से भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। फिर भी स्टाफ उपलब्ध न हुआ तो लोग आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
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डॉक्टर बिना बेकार बोगधार का आलीशान भवन
नौहराधार (सिरमौर)। नौहराधार के अंतर्गत आने वाली बोगधार पीएचसी के आलीशान भवन में ताले लटके हुए हैं। यहां पर महज तीन दिन ही चिकित्सक की सेवाएं मिल पा रही है। सोमवार सुबह 10:45 बजे तक चिकित्सक के आने का इंतजार किया गया लेकिन वहां पर कोई नहीं पहुंचा। पीएचसी में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने पीएचसी को खोल रखा था। सिरदर्द या सर्दी जुखाम से संबंधित मामूली दवाइयां चपरासी ही लोगों को वितरित कर रहा है। विभाग के अनुसार यहां पर नियमित रूप से चिकित्सक तैनात किया गया है लेकिन कई बार संगड़ाह अस्पताल में चिकित्सकों के छुट्टी पर जाने से यहां से चिकित्सक डेपुटेशन पर सगड़ाह भेजे जाते हैं। संगड़ाह में इन दिनों कुछ चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे हैं। लिहाजा, बोगधार से चिकित्सक की ड्यूटी संगड़ाह लगाई गई है।
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सतौन में ग्लूकोस चढ़ाने के भी नहीं प्रबंध
सतौन (सिरमौर)। समय: सुबह 10:15 बजे। स्थान पीएचसी सतौन। पीएचसी में तैनात चिकित्सक अपने कैबिन में मरीजों का चेकअप कर रहे हैं। सुबह करीब पौने दस बजे नियमित रूप से यहां पर चिकित्सक अपनी सेवाएं देते हैं। इस पीएचसी में चिकित्सक की तैनाती तो कर दी गई है लेकिन अन्य सुविधाओं का अभाव है। दस पंचायतों के केंद्र बिंदु सतौन में पीएचसी खुलने से लोगों को सहूलियत हुई है। यहां पर रोजाना 40 से 50 की ओपीडी है। अस्पताल में गारबेज पिट की सबसे गंभीर समस्या है। अस्पताल की डिस्पोजल सिरिंज और अन्य मेडिकल वेस्ड नष्ट करने के लिए हर रोज गाड़ी में पांवटा पहुंचाया जाता है। अस्पताल में मरीजों के लिए बिस्तरों का इंतजाम नहीं है जिस वजह से आपात स्थिति में यहां से मरीजों को रेफर करना पड़ता है। हालात यह है कि यहां पर ग्लूकोस चढ़ाने तक के पुख्ता प्रबंध नहीं है।