कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में प्रतिबंध के बावजूद गुटखा, तम्बाकू व खैनी का कारोबार फलफूल रहा है। हरियाणा की सीमा से सटे इलाकों में रोजाना भारी मात्रा में गुटखा-खैनी की खेप पहुंच रही है। हैरत की बात यह है कि पुरुषों के अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे व महिलाएं भी गुटखे व खैनी का सेवन कर रहे हैं। गुटखा खैनी पर प्रतिबंध के बावजूद संबंधित विभाग इसकी बिक्री पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है।
गौरतलब है कि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण कालाअंब में रहने वाले प्रवासी लोगों की जनसंख्या हजारों में है। स्थानीय लोगों सहित लगभग 25000 प्रवासी कामगार तथा दिहाड़ीदार मजदूर कालाअंब व इसके साथ लगते अन्य क्षेत्रों में रह रहे हैं।
कालाअंब क्षेत्र में औसतन 70 प्रतिशत लोग गुटखे व खैनी का सेवन कर रहे हैं जिनमें महिलाएं लगभग 25 प्रतिशत व 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे 20 फीसदी हैं। जबकि पुरुष 80 फीसदी गुटखे व खैनी इत्यादि का सेवन कर रहे हैं। एक व्यक्ति रोजाना औसतन 10 पाउच गुटखा व खैनी का सेवन कर रहा है। इस कारण यह उत्पाद मनमाने दामों में बेचे जा रहे हैं। 25 से 30 रुपये प्रति व्यक्ति औसत के हिसाब से इन उत्पादों की बिक्री एक से डेढ़ लाख की प्रतिदिन हो रही है।
औद्योगिक क्षेत्र में रह रहे प्रवासी कामगारों की कुल आबादी का 70 फीसदी हिस्सा हिमाचल में हैं। यहां गुटखा-खैनी पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके यहां पर धड़ल्ले से इसकी बिक्री हो रही है। हरियाणा राज्य की सीमा होने के कारण इसे रोक पाना संबंधित विभागों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है क्योंकि दूसरे राज्य की सीमा में कार्रवाई नहीं की जा सकती। लिहाजा प्रदेश में गुटखा व खैनी को रोक पाना आसान काम नहीं है।
औद्योगिक क्षेत्र के लगभग सभी उद्योगों में गुटखा व खैनी के सेवन पर रोक लगाई गई है। बावजूद इसके चोरी छिपे यहां गुटखा, खैनी पहुंच रहा है। कुछ उद्योगों के प्रशासनिक अधिकारियों में राजेंद्र कुमार, राजेश अवस्थी, पंकज शर्मा व वरुण आदि ने बताया कि उद्योगों में कार्य के दौरान ऐसी चीजों के सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया है। फिर भी चोरी छिपे सेवन हो रहा है। प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री को रोकने के ठोस उपाय किए जाने चाहिए।
उधर, स्वास्थ्य विभाग नाहन के चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अतुल कायस्था ने बताया कि प्रदेश में गुटखे, खैनी व मशहरी आदि पर प्रतिबंध है लेकिन एक श्रेणी के तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध नहीं है। इनमें तम्बाकू, बीड़ी सिगरेट आदि शामिल हैं। समय-समय पर दुकानों का निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने बताया कि गुटखा या खैनी की बिक्री करते यदि कोई पकड़ा जाता है तो उसे दो लाख रुपये तक का जुर्माना फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट के तहत किया जा सकता है।
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