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‘कब दल को वो बदल गया, पता ही न चला’

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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। भाषा कार्यालय नाहन की ओर से बौद्धिक संपदा दिवस पर मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर नासिर यूसुफजई ने की। जबकि, जिला भाषा अधिकारी अनिल हारटा इस दौरान विशेष रूप से मौजूद रहे। कवियों ने सर्वप्रथम साहित्यकार एवं व्यंग्यकार प्रभात कुमार की माता के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। तत्पश्चात साहित्य के उत्थान को लेकर चर्चा की गई। इसमें कवि सम्मेलनों को स्कूल-कॉलेजों तक ले जाने, वरिष्ठ कवियों को अधिक महत्व देने आदि सुझाव सामने आए। इस पर भाषा अधिकारी अनिल हारटा ने अपनी सहमति जताई। तत्पश्चात कवि चिर आनंद ने लोस चुनाव में उत्तर प्रदेश से समा उम्मीदवार आजमखां को उसकी अभद्र भाषा पर कविता के माध्यम से जमकर खरी खोटी सुनाई। नवोदित कवि उपेश चौहान ने लोग कहते हैं कि सब ठीक होगा.., कविता पर अपनी प्रस्तुति से समा बांधा। राम कुमार सैनी ने दलबदलु नेताओं पर कटाक्ष कर वाहवाही बटोरी। उनकी बानगी देखिए, झंडा लिए हमेशा चलता था सबसे आगे, कब दल को वो बदल गया पता ही न चला.., कांति सूद ने रिमझिम सावन की फुहार, काली कघाओं की कतार.., कविता से प्रशंसा दाद बटोरी। पंकज तन्हा ने इन चुनावों में, किसी दूसरे के कहने पर, वोट देने मत जाना, सुनो बिक मत जाना.., से लोगों से बिना किसी के झांसे में आए मतदान करने की बात कही। दीपचंद कौशल ने लगता है जैसे सब खुशियां गुजर गईं, जब से सुना है दोस्त की माता गुजर गईं.., श्रीकांत अकेला ने जो चमन का पहरेदार नहीं, वो इस माटी का हकदार नहीं.., अर्चना शर्मा ने जिस को हासिल हो इल्म की दौलत, वो बहुत खुशनसीब होता है.., अनुदीप भारद्वाज ने बिटिया मेरी सयानी हो गई है..., धनवीर सिंह परमार ने मनुवाद पर साहिब करत यूं प्रहार, स्वस्थ सभ्य समाज में, खूब फलें संस्कार..., काव्य पाठ पेश किया।
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