पढ़ाई पूरी कर मॉडलिंग का शौक जागा तो बॉलीवुड पहुंच गए। चार साल तक वहां मॉडलिंग भी की, लेकिन अचानक सबकुछ छोड़ वापस गांव आकर खेती में ऐसे जुटे कि आज वो सालाना 25 लाख तक कारोबार कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं हिमाचल के मंडी जिले के निवासी ललित कुमार की। इन्होंने कृषि औजार बनाकर पारंपरिक व्यवसाय को नया स्वरूप दिया। पांच-छह युवाओं को भी रोजगार मुहैया करवाया है।
जिले के टांडू निवासी ललित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत पैतृक गांव में पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। सालाना 25 लाख तक कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने वल्लभ कॉलेज मंडी से वर्ष 2004 में बीए पास की।
इसके बाद बॉलीवुड चले गए। चार वर्ष मॉडलिंग करने के बाद वापस लौटे और गांव में पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में जुट गए।
ललित ने वर्ष 2008 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उद्योग विभाग से कृषि औजार का उद्योग स्थापित करने के लिए चार लाख 88 हजार कर्ज लिया। एक लाख 22 हजार सब्सिडी मिली। उन्होंने हैमर मशीन लगाकर पारंपरिक हथौड़े से निजात पाई।
धीरे-धीरे लेथ मशीन, पॉवर प्रेशर लगाकर व्यवसाय को बढ़ाया। वह सारा कार्य आधुनिक मशीनों से कर रहे हैं। उनके बनाए कृषि औजार प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बेचे जा रहे हैं। इनमें हल, दराट, दराटी, कुदाली, कुल्हाड़ी, आरी, फरूआ, फावड़ा सहित कई औजार शामिल हैं।
लघु उद्योग में पिता जगदीश चंद भी उनकी सहायता कर रहे हैं। 5-6 आईटीआई पास युवकों को रोजगार दे रखा है। ललित पिछले एक वर्ष से पुराने स्कूटर इंजन से हल बनाने के कार्य पर प्रयोग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि पुराने स्कूटर के इंजन आसानी से बाजार में उपलब्ध हो जाते हैं। उनका स्कूटर हल बनाने का सपना शीघ्र साकार होगा।
अतिरिक्त उपायुक्त गोपाल चंद ने बताया कि मंडी जिले में अब तक इस योजना के तहत 223 पात्र लोगों को अपनी औद्योगिक इकाई लगाने के लिए 2 करोड़ 63 लाख रुपये अनुदान के रूप में दिए गए हैं।