'नियमित जांच और टीबी की दवाओं से ही ठीक हो जाते हैं'
विभाग के अध्यक्ष डॉ. बृज शर्मा और एसोसिएट प्रो. डॉ. विशाल बोध ने बताया कि जागरूकता के अभाव में इस बीमारी का पता नहीं लगता है। अगर समय रहते विभाग में उपचार करवाने आएं तो संबंधित चिकित्सक पेट के अल्ट्रासाउंड और अन्य टेस्ट करवाकर इस बीमारी का पता लगा सकते हैं। यह संक्रमण एक व्यक्ति से किसी दूसरे में नहीं फैलता है। वहीं 95 फीसदी मरीज चिकित्सकों के नियमित जांच और टीबी की दवाओं से ही ठीक हो जाते हैं।