रामपुर बुशहर। बिथल में आयोजित सम्मेलन में सीटू नेताओं ने कहा कि बीते पांच अप्रैल को दिल्ली में हुई किसान मजदूर संघर्ष रैली में उमड़ी भीड़ ने लोगों के बढ़ते गुस्से का संकेत दिया है।
यह कॉरपोरेट पर लाभ की बौछार करने के खिलाफ है। दशकों से विकसित बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को निजी मालिकों को औने पौने दामों पर बेचना, श्रमिकों और किसानों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करना, भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्रों पर कब्जा करने के लिए विदेशी पूंजी को आमंत्रित कर केंद्र सरकार लूटने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
देश को कुछ धनी व्यापारिक गुटों से बचाने के लिए मजदूरों और किसानों ने पूरे देश में एक निरंतर और तीव्र आंदोलन शुरू करने के लिए हाथ मिलाया है।
अदाणी एग्री फ्रेश मजदूर यूनियन संबंधित सीटू का पांचवां इकाई सम्मेलन रविवार को बिथल में मनाया गया। इसमें 3 सदस्यों के अध्यक्ष मंडल का चुनाव किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ पर सीटू शिमला जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, रणजीत और अमित ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार की नवउदारवादी और पूंजीपति परस्त नीतियों के चलते बेरोजगारी, गरीबी, असमानता और रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है। बेरोजगारी और महंगाई से गरीबी और भुखमरी बढ़ रही है।
भूख से जूझ रहे देशों की श्रेणी में भारत पिछड़ कर 121 देशों में 107वें पायदान पर पहुंच गया है। यूनियन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रविंद्र जिष्टू ने कहा कि नवउदारवादी नीतियों को बदलने के लिए तीखे संघर्ष किए जाएंगे।
सम्मेलन में 11 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया जिसमें रविंद्र जिष्टू को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। प्रमोद उपाध्यक्ष, सुनील जिष्टू महासचिव, प्रदीप सचिव, हेमराज कोषाध्यक्ष, भजन, राकेश मेहता, सुनील, अजय भैक, विकास भैक और हरीश को सदस्य चुना गया। संवाद