रामपुर में विजयी दशमी पर्व पर पथ संचलन करते स्वयं सेवक। संवाद
. रामपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने मनाया 101वां स्थापना दिवस
. सत्यनारायण मंदिर में महिलाओं ने स्वयं सेवकों पर बरसाए फूल
संवाद न्यूज़ एजेंसी
रामपुर बुशहर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रामपुर नगर इकाई ने मंगलवार को विजयदशमी पर्व और संघ का 101वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन किया और पथ संचलन निकालकर राष्ट्रभक्ति, एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। चाटी से शुरू हुआ पथ संचलन एनएच-5 से होते हुए रामपुर बाजार पहुंचा और बाजार की परिक्रमा करते हुए सत्यनारायण मंदिर परिसर में संपन्न हुआ। मंदिर के समीप महिलाओं ने स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ शहर के समीप चाटी में शस्त्र पूजन के साथ हुआ। चाटी पुल से होते हुए स्वयंसेवक मुख्य बाजार पहुंचे और वहां से सत्यनारायण मंदिर तक संचलन किया। मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संघ के प्रांत कार्यवाह डॉ. चंद्र प्रकाश ने स्वयंसेवकों को विजयदशमी के महत्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि से अवगत करवाया। डॉ. चंद्र प्रकाश ने कहा कि शस्त्र पूजन और विजयदशमी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख उत्सवों में शामिल हैं। संघ में छह उत्सव मनाए जाते हैं, जिनमें विजयदशमी का विशेष महत्व है। यह पर्व स्वयंसेवकों को राष्ट्र के प्रति अपने संकल्प, समर्पण और कर्तव्यभाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। संघ के संस्थापक का ध्येय राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना था और संगठन इसी उद्देश्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न स्थानों पर पथ संचलन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य समाज में अनुशासन, एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करना है। प्रांत कार्यवाह ने कहा कि संघ आने वाले समय में समाज परिवर्तन के उद्देश्य से पंच परिवर्तन के विचार को आगे बढ़ा रहा है। इसमें सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कारों को मजबूत करना, स्वच्छ पर्यावरण, नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता और सेवा भाव को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के विभिन्न हिस्सों में अराजकता, आतंकवाद और आपसी मतभेद जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में भारत की सनातन परंपरा के मूल्यों और विचारों के माध्यम से शांति, सद्भाव और आपसी समन्वय का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति और समाज में सद्भाव की कामना की गई। विजयदशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया।