संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर हिमाचल के सबसे दुर्गम और सीमांत जिलों में से एक है। यहां के युवाओं ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी प्रतिभा साबित की है। आईएफएस अधिकारी विश्वेश नेगी की उपलब्धि भी इसी परंपरा का एक उदाहरण है। उन्होंने दुर्गम एवं सीमांत गांव कानम से विश्व मंच तक का सफर तय किया है। पूह तहसील के कानम गांव के मूल निवासी विश्वेश नेगी को ईरान की राजधानी तेहरान में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। नेगी की उपलब्धि किन्नौर और हिमाचल के युवाओं को यह दर्शाती है कि उनके सपनों की उड़ान किसी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है। उनका जीवन उन युवाओं के लिए एक उदाहरण है जो भारतीय विदेश सेवा या सिविल सेवा में भविष्य बनाना चाहते हैं। कानम जैसे सीमांत गांव से निकलकर भारतीय विदेश सेवा तक पहुंचना बड़ी बात है। यह दर्शाता है कि प्रतिभा और मेहनत के लिए भौगोलिक सीमाएं बाधा नहीं हैं। उनकी सफलता उन युवाओं को संदेश देती है जो ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े लक्ष्य हासिल करने का सपना देखते हैं। विश्वेश नेगी इससे पहले भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (ओशिनिया) के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनका लंबा अनुभव है। उन्होंने तेहरान, रोम और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। तेहरान में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय में आई है जब भारत और ईरान के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का विशेष महत्व है। एक अनुभवी भारतीय विदेश सेवा अधिकारी के रूप में नेगी की कूटनयिक समझ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनका कार्य भारत और ईरान के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। यह दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना किसी भी राजनयिक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।