. नेरवा में मानसून से निपटने की तैयारियों की हकीकत उजागर संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)।
शिमला-नेरवा मुख्य मार्ग पर वीरवार को पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने से सड़क किनारे खड़ी दो कारें क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत रही कि उस समय वाहनों में कोई सवार नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने नेरवा में मानसून से निपटने की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दिया है। बाजार और लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह के बीच का मार्ग भूस्खलन से प्रभावित रहता है। बारिश होते ही यहां मलबा गिरना शुरू हो जाता है। पहाड़ी से गिरने वाला मलबा और पत्थर सड़क को अवरुद्ध कर देते हैं। इससे वाहनों की आवाजाही घंटों प्रभावित रहती है। पैदल चलने वाले लोगों को भी जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेरवा में पर्याप्त सार्वजनिक पार्किंग नहीं है। इस कारण वाहन इसी सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं। हर वर्ष बरसात के दौरान कई वाहन भूस्खलन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त होते हैं। यह मार्ग शैक्षणिक संस्थानों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं द्वारा उपयोग किया जाता है। अस्पताल, सरकारी कार्यालयों और बाजार आने वाले लोग भी इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं। लोगों ने लोक निर्माण विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नेरवा-देइया-कुपवी मार्ग के चौड़ीकरण में मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हुआ। परिणामस्वरूप बारिश के समय यही मलबा बहकर नीचे की सड़क पर आ जाता है। कई बार यह बरसाती नाले का रूप ले लेता है। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के नीचे नेरवा बस अड्डा और घनी आबादी वाला इलाका स्थित है। हर वर्ष मलबा लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। बसों को सुरक्षित स्थानों पर हटाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से हस्तक्षेप का आग्रह किया है।