सांगला (किन्नौर)। कोरोना के चलते जनजातीय जिले किन्नौर के मनोरम पयर्टन स्थल इस साल सुने रहे। जिले में बीते वर्षों की अपेक्षा वर्ष 2020 में सबसे कम सैलानी घूमने पहुंचे। ऐसे में पर्यटन कारोबारियों को खासा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
प्राकृतिक नजारों से भरपूर किन्नौर जिले के पयर्टन स्थल इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण पयर्टकों को नहीं लुभा पाए। जिले में जहां हर वर्ष 40 हजार से अधिक सैलानी पहुंचते थे, वहीं इस वर्ष आंकड़ा 2397 तक ही सिमट गया। इनमें विदेशों से आने वाले केवल 105 की पर्यटक शामिल हैं। मार्च में शुरू हुई कोरोना महामारी से किन्नौर जिले में पर्यटन व्यवसाय पर बट्टा लग गया। जिले के कल्पा, सांगला, रक्षम, छितकुल, बटसेरी, खरोगला, मस्तरंग, पूह, नाको, भावावैली सहित अन्य पर्यटन स्थलों में इस वर्ष अपेक्षाकृत कम पर्यटक ही पहुंचे। अब सरकार की मंजूरी के बाद पर्यटन गतिविधियां शुरू हो गई हैं। किन्नौर जिले में बर्फबारी से भले ही तापमान लुढ़क गया हो लेकिन अब पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई है। धीरे-धीरे पर्यटन व्यवसाय उभरने लगा है। इससे कारोबारी खुश हैं।
किन्नौर होटल एसोसिएशन के मुख्य प्रवक्ता शांता कुमार नेगी, जिलाध्यक्ष मोहन प्रकाश नेगी, महासचिव मुकेश रोमदारी, जीतराम नेगी, भीष्म सिंह ठाकुर, रघुवीर सिंह, प्रदीप नेगी ने कहा कि जिले में इन दिनों सैलानियों की आवाजाही शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि नए वर्ष से पर्यटन कारोबारियों को काफी उम्मीद है।
जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. अवनिंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि इस वर्ष पर्यटन कारोबारियों को आर्थिक मंदी के दौर से गुजरना पड़ा है। जिले में अब सैलानियों की आवाजाही पर्यटन के दृष्टिगत एक अच्छी खबर है। प्रदेश और जिले के विकास में पर्यटन की अहम भूमिका है।