आनी के मेला मैदान में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन
कृष्ण चंद शास्त्री ने अपने अमृत वचनों से भाव विभोर किया पंडाल
आनी( कुल्लू)। आनी के मेला मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन शनिवार को वृंदावन से पधारे कथा वाचक भागवत भास्कर कृष्ण शास्त्री ठाकुर ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म सहित अन्य प्रसंग सुनाए।
उन्होंने शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वन में चले गए। उनको प्यास लगी तो समीक ऋषि से पानी मांगा। ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि साधु ने अपमान किया है। उन्होंने मरा हुआ सांप उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आएगा और राजा को जलाकर भस्म कर देगा। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है। समीक ऋषि ने जब यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी तो वह अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां बड़े ऋषि, मुनि देवता आ पहुंचे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंचे। शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। वहीं उन्होंने इससे पूर्व हिमाचल भूमि में सभी तीर्थ स्थलों का महत्व बताया।
कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के दौरान धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जम कर झूमे। कथा में दूसरे दिन बड़ी संख्या में महिला-पुरुष कथा सुनने पहुंचे। इस कार्यक्रम के आयोजक हेमराज शर्मा, टीकम शर्मा, कुमारसैन के श्यामा परिवार ने तमाम भक्तजनों से अधिक से अधिक संख्या में कथा पंडाल में आकर कथा श्रवण करने का अनुरोध किया।